रेलवे की लापरवाही : जन-शताब्दी एक्सप्रेस के गैरएसी बोगी में धूल-कण से यात्री को हो रही परेशानी


चाईबासा(CHAIBASA): झारखण्ड-उड़ीसा का लौहांचल कहे जाने वाले पश्चिम सिंहभूम जिले के नोवामुण्डी, बडा़जामदा, गुवा, डांगुवापोसी, किरीबुरु, मेघाहातुबुरु, करमपदा आदि के अलावा उडी़सा का बड़बिल, बोलानी, जोडा़, बांसपानी आदि क्षेत्रों से रेलवे प्रति माह अरबों रूपये का राजस्व लौह अयस्क की ढुलाई में कमा रहा है. लेकिन, इन क्षेत्रों के लोगों के लिये यात्री सुविधाओं के नाम पर एक मात्र बड़बिल-हावड़ा जन शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन ही चल रही है. सबसे तकलीफ व परेशान करने वाली बात यह है कि इस ट्रेन में सफर करना अर्थात् लौह चूर्ण व धूल से भरी होली खेल कपड़ा व शरीर को गंदा कर अपने-अपने घर जाना है.
लौह-चूर्ण के धूल से परेशान यात्री
उल्लेखनीय है कि उडी़सा के बड़बिल व झारखण्ड के बडा़जामदा, नोवामुण्डी, डांगुवापोसी क्षेत्र से प्रतिदिन दर्जनों मालगाडी़ लौह अयस्क चाईबासा, राज खरसावां के रास्ते विभिन्न शहरों में स्थित स्टील प्लांटों में भेजी जाती है. मालगाडी़ से लौह चूर्ण ढुलाई के दौरान रेल पटरियों पर निरंतर गिरते रहती है. हाल यह हो गया है कि जब इसी रूट से उक्त जन शताब्दी ट्रेन अपनी रफ्तार जैसे-जैसे पकड़ती है, वैसे-वैसे पटरी पर गिरा लौह चुर्ण उड़कर यात्री ट्रेन के डिब्बों के अंदर प्रवेश कर लोगों को धूल से भर दे रही है. ट्रेन की एसी बोगी में तो इस धूल का असर नहीं होता है, लेकिन गैर एसी कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना प्रतिदिन करना पड़ रहा है. कोच के खाली सीटों से लेकर समान रखने वाले स्थानों पर धूल की मोटी परत बैठी रहती है. इसकी साफ-सफाई नहीं की जाती.
गंदगी के साथ ही पीने के पानी की भी है समस्या
बड़बिल स्टेशन से ट्रेन खुलने के बाद जब विभिन्न स्टेशनों पर यात्री अपने सीट पर बैठते हैं, वैसे हीं उनके कपड़े व बैग गंदे हो जाते हैं. इसके बाद टाटानगर स्टेशन तक लौह चूर्ण का धूल निरंतर बोगी में घुसकर लोगों को धूल से भर देता है. प्रदूषण इतना अधिक होता है कि यह धूलकण लोगों के नाक व आंख के अंदर जमा हो जाता है, जो काफी घंटों के प्रयास से धीरे-धीरे निकलता है. यह धूल नाक व मुंह के रास्ते फेफड़ों व शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर रहा है. इस ट्रेन से सफर करने वाले दर्जनों यात्रियों ने की इस शिकायत के बाद सत्यता की जांच की गई जिसमें ये बात सही पाई गई. चक्रधरपुर रेल डिविजन अन्तर्गत इस मुख्य रेल मार्ग को सिर्फ माल ढुलाई के दृष्टिकोण से रेलवे विकास कर रही है. यात्री सुविधाओं के नाम पर बडा़जामदा जैसे स्टेशनों पर बेहतर यात्री शेड तक नहीं है ताकि वर्षा व धूप से लोग बच सकें. शौचालय, प्रतिक्षालय, पेयजल आदि की सुविधा किसी से छुपी नहीं है. गर्मी के समय इस ट्रेन में ठंडे पानी तक की व्यवस्था नहीं है. ट्रेन में कैटरिंग करने वालों द्वारा हर बार यहीं कहा जाता है कि कैटरिंग का ठेका बदलने वाला है इसलिए पानी को ठंडा करने हेतु इस्तेमाल किया जाने वाला बर्फ ठेकेदार नहीं मंगाता है. इसके अलावा सभी डिब्बों के शौचालयों में डब्बा भी उपलब्ध नहीं रहता.
रिपोर्ट: संदीप गुप्ता, गुवा(चाईबासा)
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