कोलनेट को हटाकर सैप सिस्टम लागू करने का कोयला कर्मी परेशान, सैलरी मिलने से हो रही देरी


धनबाद(DHANBAD)- कोलनेट में कोई भी शिकायत नहीं , अचानक सैप लागू कर दिया गया. किसी तरह का कोई प्रशिक्षण सैप शुरू करने से पहले न किसी अधिकारी को दिया गया, न ही किसी कर्मचारी को , फिर भी कोल् इंडिया में सिस्टम लागू कर दिया गया. यह जानने की कोशिश नहीं की गई कि इससे कितनी परेशानी हो रही है और इसके निदान क्या है. कोल इंडिया की विभिन्न इकाइयों; मसलन बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल आदि में बीते कुछ महीनों से वेतन भुगतान कोल नेट के जरिए सैप से किया जा रहा है.
सैप की विसंगतियों की वजह से कोयलाकर्मी बेहद परेशान है
सैप की विसंगतियों की वजह से कोयलाकर्मी बेहद परेशान है. इसे लेकर झारखंड इंटक के महासचिव एके झा ने कहा कि लंबे समय से कोलनेट के जरिए पेमेंट हो रहा था. कोलनेट में कोई भी शिकायत नहीं है. अचानक सैप लागू कर दिया गया. बेवजह सैप को कोलनेट की जगह पर ला देना, समझ से परे है. उन्होंने कहा कि जब से सैप आया है, समय पर न तो पैसे मिलते हैं, न तो सैलेरी स्लिप (वेतन पर्ची), यहां तक कि कई मदों में पैसे सैलेरी से मनमाने ढंग से काट लिए जाते हैं, जिसकी व्याख्या करने वाला कोई नहीं है. सैप से जुड़ी परेशानियों के निदान के लिए न तो कोई विभाग बनाया गया और न ही कोई मॉनिटरिंग सिस्टम की शुरूआत की गई है. सैप की वजह से नाहक ही समस्याएं उत्पन्न हो रही है. फलतः,
औद्योगिक संबंध पर आंच आ रही है
औद्योगिक संबंध पर आंच आ रही है और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि कोल इंडिया सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है. सैप किसी भी सरकारी संस्थान में विकसित नहीं किया गया है. लोक उद्यम से जुड़ी कंपनी द्वारा जानबूझकर अधिकारियों-कर्मियों को परेशानी में डाला गया है. झा ने कहा कि इससे आर्थिक और मानसिक नुकसान हो रहा है. जब कोलनेट पूरी तरह दुरूस्त था, तो कोयला मंत्रालय एवं कोल इंडिया ने बिना अधिकारियों व कर्मियों को विश्वास में लिए , श्रमिक यूनियनों की सहमति लिए बिना सैप को लागू कर दिया गया. यह अतार्किक और हैरान करने वाला फैसला है. कहा कि जो कंपनी में काम कर रहे हैं, उन्हें तो सैप से दिक्कत हो ही रही है, रिटायर करने वालों को भी पीएफ से लेकर ग्रेच्युटी तक में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
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