ये है विश्व का सबसे पुराना मां दुर्गा का मंदिर, जहां मां ने किया था मुंड राक्षस का वध, नवरात्रि के दौरान खूब उमड़ती है भीड़

कैमूर(KAIMUR):कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड के पवरा पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी धाम में दर्शन पूजन को लेकर नवरात्रि के पहले दिन भारी भीड़ दिखाई दिया. जहां सुरक्षा को लेकर पुलिस बल और मजिस्ट्रेट के साथ मंदिर प्रशासन की टीम भी दिखाई दिया. जिससे की जाम की समस्या से श्रद्धालुओं को ना गुजरना पड़े. सुरक्षा को लेकर 15 चेकप्वाइंट बनाया गया है. जगह-जगह सीसीटीवी लगाया गया है और हेल्पलाइन सेंटर भी बनाया गया है. यह मंदिर पवरा पहाड़ी पर 600 फीट की ऊंचाई पर है.
यहां अद्भुत तरीके से दी जाती है बकरे की बली
यह विश्व का प्राचीनतम मंदिर बताया जा रहा है. यहां बकरे की बली अद्भुत होती है. बकरे को काटा नहीं जाता बल्कि अक्षत फूल मारकर बलि दी जाती है. ऐसा अनोखा बल्कि पूरे विश्व में कहीं नहीं है. मंदिर श्री यंत्र के आकार का अष्ट कोडिय है. मां वाराही रूप में विराजमान है. जिनका वाहन महीश है.मंदिर के मुख्य भाग में पंचमुखी शिवलिंग स्थापित हैं. कहा जाता है कि सूर्य की स्थिति के साथ शिव के पत्थर का रंग बदलता है. विदेश से लोग यहां पर दर्शन पूजन के लिए आते हैं.
मंदिर को सजाने के लिए थाईलैंड और बैंकॉक से मंगाये जाते है फूल
नवरात्रि में सप्तमी अष्टमी और नवमी को निशा पूजा के लिए मंदिर सजाने के लिए विदेश (थाईलैंड और बैंकॉक )से फूल मंगाए जाते हैं.मां मुंडेश्वरी धार्मिक न्यास परिषद के सचिव अशोक सिंह बताते हैं कि देश का सबसे प्राचीनतम मंदिरों में इनकी गिनती होती है. सुबह से ही हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हैं, 526 ईसा पूर्व यह मंदिर विराजमान था.मुंड राक्षस को यहां पर मां ने वध किया था. जिस कारण मुंडेश्वरी नाम पड़ा. सप्तमी अष्टमी और नवमी को हम लोग मां का भव्य सजावट करते हैं.जिसके लिए थाइलैंड और बैंकॉक से सजावट के लिए फूल मंगाया जाता है. 10 सालों से हम लोग विदेश के फूल मंगा रहे हैं, सभी जगह सीसीटीवी कैमरा लगा है.श्रद्धालु गुड्डू सिंह ने बताया कि हम लोग बचपन से ही यहां पर आते हैं यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। नवरात्रि के पहले दिन भारी भीड़ यहां पर होता है.यहां के पशु बलि विश्व विख्यात है जहां पशुओं को बिना काटे बली दिया जाता है.
भक्तों की मन्नत मां करती है पूरी
मुंडेश्वर धाम के पुजारी राधे श्याम झा ने बताया यह भारत का सबसे प्राचीन मंदिर है. जो अष्टकोड़ीय है जो श्रीयंत्र के आकार का है. यहां पर लोग मन्नत मांगते हैं मन्नत पूरा हो जाने में बकरा चढ़ाते हैं। बकरा बली का अनोखी प्रथा है, जिसे काटा नहीं जाता है, बल्कि अक्षत फूल मारने से ही बकरा मूर्छित हो जाता है. फिर अक्षर मारने के बाद बकरा जिंदा हो जाता है. देश ही नहीं विदेशों से लोग यहां पर आते हैं. ऐसी प्रथा कहीं नहीं है.
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