ईडी ही नहीं अब सीबीआई से भी डरेगा सोरेन परिवार, देखिये और क्या क्या बोल गये निशिकांत दुबे

    ईडी ही नहीं अब सीबीआई से भी डरेगा सोरेन परिवार, देखिये और क्या क्या बोल गये निशिकांत दुबे

    रांची (RANCHI)- हेमंत सोरेन और सोरेन परिवार के प्रति भाजपा सांसद निशिंकात दुबे का आग उगलना कोई नयी बात नहीं है. सोरेन परिवार का नाम सुनते ही निशिंकात दुबे की उग्रता देखने लाईक होती है, संताल अवैध खनन मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने में भी निशिंकात दुबे को अपनी जीत नजर आती है, उनका मानना है कि इस मामले में हेमंत सोरेन का फंसना तय है. अब सिर्फ दिन गिनने का इंतजार है, उधर सीबीआई की रिपोर्ट आयी और इधर हेमंत सोरेन की सरकार गयी. इसी उत्साह से लबरेज निशिकांत दुबे ने सोरेन परिवार पर तंज कसते हुए कहा कि अब सोरेन परिवार सिर्फ ईडी से ही नहीं डरेगा, बल्कि अब उसे सीबीआई का भी सपना आयेगा. निशिंकात यहीं नहीं रुकते हैं बल्कि पूरे के पूरे सोरेन परिवार को जेल भेजवाने की शपथ भी लेते हैं. उनका दावा है कि सोरेन परिवार में संताल इलाके में लूट मचा रखी है, और वह अंतिम दम कर इसका मुकाबला करेंगे.

     पहले भी राजनीतिक सनसनी फैलाते रहे हैं निशिकांत

    यहां याद दिला दें कि जब अवैध खनन आवंटन के मामले में राज्यपाल के द्वारा चुनाव आयोग से उसकी राय मांगी गयी थी, तब निशिकांत दुबे हर घंटे एक नया ट्वीट कर सनसनी फैला रहे थें, इसमें कई दावे तो बिना सर पैर के थें. जिसका कोई आधार नहीं था, लेकिन निशिकांत दुबे हेमंत सरकार की विदाई की गाथा लिख लिख अखबारों और चैनलों की सुर्खियां बन रहे थें, गोया वह भाजपा सांसद कम और चुनाव आयोग के प्रवक्ता ज्यादा हों. हालत यह हो गयी थी कि कई अखबार और पोर्टल चुनाव आयोग की खबर लेने के लिए हर घटें निशिकांत दुबे के ट्वीट को खंगालते देखे जा रहे थें. निशिकांत दुबे का ट्वीट उनका हेडलाईन बन रहा था. लेकिन चुनाव आयोग की वह चिठ्ठी कहां गयी, आज कोई नहीं जानता. उसका हश्र क्या हुआ, किसी को कुछ पता नहीं, और आज तक किसी ने भी निशिकांत दुबे को उस दावे की याद नहीं दिलाई और उसका हश्र क्या हुआ, इसका जवाब नहीं मांगा.

    टिकट को बचाने की कवायद

    हालांकि जानकारों का दावा है कि सोरेन परिवार पर निशिकांत दुबे का यह ताजा हमला 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी टिकट को बचाने की कवायद मात्र है. क्योंकि जिस तेजी से झारखंड की राजनीति में बाहरी-भीतरी का सवाल एक प्रमुख मुद्दा के रुप में सामने आया है, और जमीन पर इसकी अनुगूंज सुनाई पड़ने लगी है. इसकी भनक भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व को भी है और टिकट बंटवारें के वक्त वह इसका समाधान खोजने का भरपूर प्रयास करेगी. जिसकी अंतिम परिणति झारखंड की राजनीति में चमकते कई गैर झारखंडी चेहरों की विदाई के रुप में  हो सकती है.


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