Jharkhand loksabha Election-चार लोकसभा के 45 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में कैद, मतदान में तीन से चार फीसदी की गिरावट

    Jharkhand loksabha Election-चार लोकसभा के 45 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में कैद, मतदान में तीन से चार फीसदी की गिरावट

    Ranchi-आज शाम पांच बजते ही खूंटी, चाईबासा, पलामू और लोहरदगा में सियासी संग्राम पर विराम लग गया, और इसके साथ ही चार लोकसभा के 45 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटी में कैद हो गयी. अब यह मतपेटी 4 जून को खुलेगी और इसका फैसला सामने आयेगा कि तमाम चुनावी नारे और वादों में मतदाताओं के बीच किसका जादू चला. राहत की  बात यह रही कि चाईबासा और पलामू सहित दूसरे नक्सल प्रभावित इलाकों से भी मतदाताओं की लम्बी लम्बी कतार की तस्वीर सामने आयी.

    मतदान फीसदी में गिरावट

    अब तक की जानकारी के अनुसार सबसे अधिक मतदान की खबर खूंटी से आ रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार खूंटी में 65.82,लोहरदगा::62.60, पलामू::59.99 और सिंहभूम से 66.11 फीसदी मतदान की खबर है. यदि इसे हम पिछले चुनाव से हुए मतदान से तुलना करें तो यह काफी कम है, खूंटी में 2019 के चुनाव में 69.211 प्रतिशत मतदान हुआ था.  यदि हम वर्ष 2019 के मतदान से तुलना करें तो लोहरदगा में 2019 के चुनाव में 66.3 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार 62.60 मतदान हुआ, पलामू में 2019 के 64.34 मुकाबले 59.99 फीसदी मतदान हुआ,सिंहभूम में 2019 के 69.26 के मुकाबले इसबार महज 66.11 फीसदी मतदान हुआ. अब मतदान फीसदी में इस गिरावट को लेकर अलग-अलग आकलन किये जा रहे हैं, कई जानकार इसे बदलाव का संकेत मान रहे हैं, पलामू के बारे में खबर यह है कि शहरी मतदाताओं के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं की कतार कुछ ज्यादा लम्बी देखी गयी, यहां भी इसे बदलाव के संकेत के साथ जोड़कर देखा जा है, वहीं लोहरदगा में त्रिकोणीय मुकाबले के बीच मतदान का गिरावट को भी कई चस्में से समझने की कोशिश की जा रही है. कुछ यही हालत चाईबासा की है.

    14 में चार लोकसभा में चुनाव संपन्न

    कुल मिलाकर झारखंड की 14 में चार लोकसभा में चुनाव संपन्न हो चुका है, अब 20 मई को चतरा, कोडरमा और हजारीबाग में चुनाव होना है. जहां का मुकाबला भी रोचक होने का दावा किया जा रहा है, उसकी एक झलक आज पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के पोते आसिर सिन्हा का कांग्रेस के दामन थामने से मिली है, माना जा रहा है कि अब हजारीबाग में संग्राम अपना सबाब पर होगा, जहां भाजपा के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती होगी, लेकिन भीतरघात का संकट भी मंडराता दिख रहा है.

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