जदयू को उपेन्द्र कुशवाहा का अलविदा, नयी पार्टी बनाने की घोषणा, जानिए उनकी आगे की रणनीति

    जदयू को उपेन्द्र कुशवाहा का अलविदा, नयी पार्टी बनाने की घोषणा, जानिए उनकी आगे की रणनीति

    पटना(PATNA):  उपेन्द्र कुशवाहा ने जदयू को अलविदा करने की घोषणा कर दी है, खबर है कि इसकी सूचना जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को दे दी गयी है, उपेन्द्र कुशवाहा ने नई पार्टी बनाने की भी घोषणा कर दी है. उपेंद्र कुशवाहा की नई पार्टी का नाम राष्ट्रीय लोक जनता दल है.इस बीच दावा यह भी है कि कुशवाहा को जदयू के 16 सांसदों में 6 समर्थन प्राप्त है. ये सांसद जल्द ही उपेन्द्र कुशवाहा के साथ खड़े नजर आ सकते हैं. हालांकि अभी तक किसी भी सांसद ने उनका समर्थन नहीं किया है.  

    चिंतन शिविर के दूसरे दिन विदाई का फैसला

    यहां बता दें कि पिछले दो दिनों से उपेन्द्र कुशवाहा सिन्हा लाइब्रेरी में अपने समर्थकों के साथ बैठक कर रहे थें. इस बैठक को चिंतन शिविर का नाम दिया गया था, इस चिंतन शिविर का उद्देशय जदयू को मजबूत करने की रणनीति बनाना बताया गया था. लेकिन उसी चिंतन शिविर में उनके समर्थकों के द्वारा उन्हें सीएम का चेहरा बनाने की मांग की जा रही थी.

    जदयू को मजबूत करने के बजाय अलविदा करने का फैसला

    इस बीच आज उपेन्द्र कुशवाहा ने जदयू को मजबूत करने के बजाय अलविदा करने का फैसला ले लिया. इसके पहले उनके द्वारा जदयू में अपनी हिस्सेदारी की मांग की जा रही थी, उनका दावा यह भी था कि जदयू के चंद नेताओं के द्वारा नीतीश कुमार की घेराबंदी कर ली गयी है, और इन लोगों की कोशिश जदयू को बर्बाद करने की है. 

    बगैर हिस्सेदारी मिले ही जदयू को अलविदा क्यों कहा

    उपेन्द्र कुशवाहा यह भी दावा कर रहे थें कि जब जब भी नीतीश कुमार पर संकट आता है, वह उनके साथ खड़े रहते हैं. उनका मकसद सिर्फ नीतीश कुमार और जदयू को मजबूत करना है. लेकिन इस घोषणा के साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि आखिरकार उपेन्द्र कुशवाहा ने बगैर हिस्सेदारी मिले ही जदयू को अलविदा क्यों कहा दिया. खुद जदयू की भी चाहत तो यही थी कि उपेन्द्र कुशवाहा खुद ही जदयू को छोड़ कर चले जाये और जदयू इस किरकिरी से बच जाये. तो क्या उपेन्द्र कुशवाहा ने यह मान लिया कि अब उन्हें यहां कुछ नहीं मिलने वाला. इसके साथ ही उनके इस दावे का क्या होगा कि उनकी पूरी लड़ाई सीएम नीतीश को मजबूत करने की है.

    साफ है कि उपेन्द्र कुशवाहा को इस बात का एहसास हो गया था कि जदयू में अब उनका सम्मान नहीं होने वाला है, इससे बेहतर है कि वह अपनी पुरानी पार्टी को एक बार फिर से  पुर्नजीवित कर अपनी जमीन तैयार करें और समय देख कर किसी के साथ गठबंधन करें.

    रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार 


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