शोक की घड़ी में राम-हनुमान सा साथ: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दुख में डॉ. इरफान अंसारी ने निभाया अटूट भाईचारे का वचन

    शोक की घड़ी में राम-हनुमान सा साथ: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दुख में डॉ. इरफान अंसारी ने निभाया अटूट भाईचारे का वचन

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : बीते दिनों दिशोंम गुरु शिबू सोरेन का जाना सिर्फ राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूर्णीय क्षति है जिसके बाद से राज्य में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. ऐसे में गुरुजी के बेटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्य के मुखिया होने के साथ साथ, बेटे होने का भी फ़र्ज़ निभा रहें हैं. इन दिनों वह अपने पैतृक गांव नेमरा में रहकर ही श्राद्ध कर्म की रस्में निभा रहें हैं. ऐसे में लगातार मुख्यमंत्री से मिलने के लिए झारखंड सरकार के मंत्री भी उनके पैतृक गांव नेमरा आ रहें हैं. इसी कड़ी में बीते दिनों राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी मुख्यमंत्री से मिलने उनके गांव पहुंचे थे. मुलाकात के बाद सोशल मीडिया के जरिए मंत्री इरफान अंसारी ने पोस्ट कर अपनी भावनाओं को प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री का ढाढस बढ़ाया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "हर दुख में आपके हनुमान बनकर खड़ा रहूंगा — डॉ. इरफान अंसारी की भावुक प्रतिज्ञा

    नेमरा गांव आज भी शोक के सन्नाटे में डूबा हुआ था. झारखंड के निर्माता और दिसोम गुरु, आदरणीय शिबू सोरेन जी के निधन ने पूरे राज्य को शोकाकुल कर दिया है. गांव की गलियों में गमगीन चेहरों के बीच, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी Hemant Soren अपने पिता की अंतिम रस्मों और पूजा-पाठ में डूबे हुए थे. एक बेटे के रूप में, वे हर परंपरा को पूरी श्रद्धा और धैर्य से निभा रहे थे—ऐसा दृश्य, जिसे देखकर कोई भी भावुक हो जाए.

    झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी आज नेमरा पहुंचे. सामने खड़े थे हेमंत सोरेन जी —सफेद वेश-भूषा में, चेहरे पर अपार दुख और आंखों में अपने पिता की यादें. इस रूप में उन्हें देखकर डॉ. अंसारी की आंखें भी नम हो गईं. भर्राए स्वर में उन्होंने कहा—
    "सर, मैंने आपको इस रूप में कभी नहीं देखा. ऊपर वाले से दुआ करता हूं कि यह वेश-भूषा किसी को ना पहननी पड़े."

    उस क्षण, जैसे उनकी भावनाओं का सैलाब फूट पड़ा. वे हेमंत सोरेन के पास बढ़े और पूरे दिल से बोले—
    "हेमंत सोरेन जी हमारे राम से भी बढ़कर हैं, और मैं उनका हनुमान हूं. हर दुख में, चट्टान की तरह उनके साथ खड़ा रहूंगा."

    इन शब्दों में केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि भाईचारे का गहरा रिश्ता और अटूट निष्ठा झलक रही थी. गुरुजी के निधन ने डॉ. अंसारी को भी भीतर से तोड़ दिया था, लेकिन अपने बड़े भाई हेमंत सोरेन के लिए वे खुद को मजबूत बनाए हुए थे—ताकि इस कठिन समय में वे उनके सहारे बन सकें.

    गांव के आंगन में उस दिन सिर्फ शोक का माहौल नहीं था, बल्कि एक छोटा-सा परंतु बेहद गहरा संदेश भी था संबंध केवल खून से नहीं, दिल से भी बनते हैं और डॉ. इरफान अंसारी का यह संकल्प उसी दिल से निकला वचन था, जिसे वे जीवन भर निभाएंगे.

    अब इस मुलाकात ने न सिर्फ गांव के लोगों को भावुक कर दिया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि राजनीति से परे मानवीय रिश्ते कितने गहरे हो सकते हैं. संकट की घड़ी में दिया गया साथ, शब्दों से कहीं अधिक असरदार होता है और डॉ. अंसारी का यह वादा आने वाले समय में उनके और मुख्यमंत्री के रिश्ते को और भी मजबूत करेगा.


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