टीनपी डेस्क(TNP DESK): पिछले कुछ सालों से लोगों को मनोरंजन और काल्पनिक कहानियों से बनी फिल्म देखना कम पंसद कर रहे है लोगों को अब वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म ज्यादा पंसद आ रही है. इस वजह से लोगों के बीच बायोपिक फिल्मों का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. दर्शक ऐसी कहानियां देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं जिनमें संघर्ष, मेहनत और सफलता की सच्ची झलक दिखाई देती है. इस ट्रेंड को समझने के लिए कुछ लोकप्रिय बायोपिक फिल्मों पर नजर डालना जरूरी है.
साल 2016 में रिलीज हुई दंगल ने महिला पहलवानों की कहानी दिखाकर दर्शकों का दिल जीत लिया. एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी जिसमें क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के संघर्ष को दिखाया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। साल 2018 में रिलीज हुई संजू फिल्म ने अभिनेता संजय दत्त की जिंदगी को पर्दे पर उतारा और बड़ी हिट साबित हुई.
खेल और संघर्ष पर आधारित फिल्मों में भाग मिल्खा भाग 12 जूलाई 2013 में फिल्म रिलीज हुई थी. जिसमें सिख मिल्खा सिंह की कहानी से प्रेरित किया. वहीं मैरी कॉम जो 2014 में बॉक्सर मैरी कॉम के जीवन संघर्ष को दिखाया गया. इन फिल्मों ने साबित किया कि वास्तविक कहानियां दर्शकों को ज्यादा प्रभावित करती हैं.
देशभक्ति और साहस की कहानियों पर बनी फिल्मों को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया। शेरशाह (2021) में कारगिल युद्ध के हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा की कहानी दिखाई गई, जो युवाओं में काफी लोकप्रिय हुई. इसी तरह नीरजा (2016) ने एयर होस्टेस नीरजा भनोट की बहादुरी को दिखाया, जिसे दर्शकों ने खूब प्यार दिया. बता दें कि नीरजा भनोट एक भारतीय एयर होस्टेस थीं, जिन्होंने 5 सितंबर 1986 को Pan Am Flight 73 के अपहरण के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए 360 यात्रियों की जान बचाई थी. शिक्षा और समाज से जुड़ी कहानियों में सूपर 30 फिल्म जो 2019 में बनी था इसमें आनंद कुमार की प्रेरणादायक यात्रा दिखाई। वहीं छपाक मूवी 2020 में बनी थी. इसमें एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी दिखाई गई. जिसे दर्शकों ने काफी सराहा.
इन फिल्मों की सफलता बताती है कि दर्शक अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि फिल्म के पीछे प्रेरणा भी चाहते हैं. बायोपिक फिल्मों में दिखाया गया संघर्ष लोगों को वास्तविकता से जोड़ता है. यही कारण है कि युवा वर्ग इन फिल्मों को ज्यादा पसंद कर रहा है. उन्हें लगता है कि अगर असली जिंदगी में कोई व्यक्ति मुश्किलों को पार कर सकता है, तो वे भी अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं.
लोग पहले ही इन व्यक्तित्वों के बारे में पढ़ लेते हैं, जिससे फिल्म रिलीज होने पर उत्सुकता बढ़ जाती है. साथ ही, कलाकारों की मेहनत भी इन फिल्मों को खास बनाती है. अभिनेता किरदार में ढलने के लिए महीनों तैयारी करते हैं, जिससे कहानी ज्यादा वास्तविक लगती है.
बायोपिक फिल्मों में दर्शकों की रुचि है. लोग अब सच्ची कहानियों को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं. यही वजह है कि फिक्शन से ज्यादा रियल स्टोरी लोगों को पसंद आ रही है और आने वाले समय में भी बायोपिक फिल्मों का ट्रेंड और मजबूत होने की संभावना है.
Thenewspost - Jharkhand
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