गोल्ड की कीमत अब GOLD जैसी! रेट बढ़ते ही आसमान छूने लगे सिगरेट के दाम, कश लगाना हुआ महंगा

    गोल्ड की कीमत अब GOLD जैसी! रेट बढ़ते ही आसमान छूने लगे सिगरेट के दाम, कश लगाना हुआ महंगा

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अगर आप सिगरेट पीने के आदी हैं, तो अब हर कश आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है. सोने की कीमतों में तेजी के बीच अब सिगरेट भी “लक्ज़री” बनने की राह पर निकल पड़ा है. ऐसे में हालिया रेपोर्ट्स के मुताबिक मई 2026 से देश में सिगरेट की कीमतों में करीब 17% तक की बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं का बजट बिगड़ना शुरू हो चुका है. देश की प्रमुख तंबाकू कंपनियां, जैसे ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स पहले ही इस मूल्य वृद्धि को लागू कर चुकी हैं. कीमतों में इस उछाल के बाद जहां सिगरेट पीने वालों में चिंता बढ़ी है, वहीं शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे खिल उठे हैं.

    सिगरेट महंगी होने की खबर का असर तुरंत शेयर बाजार में देखने को मिला. ITC के शेयरों में करीब 4% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर लगभग 7% तक उछल गए. इसके चलते निफ्टी FMCG इंडेक्स में भी करीब 2% की मजबूती आई. इससे साफ संकेत मिलता है कि कंपनियों के मुनाफे पर इस बढ़ोतरी का सकारात्मक असर पड़ रहा है.

    नई कीमतों के लागू होने के बाद सिर्फ प्रीमियम ही नहीं, बल्कि सस्ते ब्रांड्स भी महंगे हो चुके हैं. उदाहरण के तौर पर, ITC के लोकप्रिय गोल्ड फ्लेक प्रीमियम सिगरेट के एक पैकेट की कीमत ₹115 से बढ़कर करीब ₹135 तक पहुंच गई है. यानी एक पैकेट पर सीधे ₹20 का अतिरिक्त बोझ. इसी तरह अन्य ब्रांड्स में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण सरकार द्वारा बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी है. ‘सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) विधेयक, 2025’ के तहत तंबाकू उत्पादों पर टैक्स में इजाफा किया गया है. नए नियमों के अनुसार, सिगरेट पर ₹2,050 से लेकर ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक तक एक्साइज ड्यूटी लगाई जा रही है. इसके अलावा पहले से लागू 40% जीएसटी भी बरकरार है. यानी कुल मिलाकर टैक्स का बोझ काफी बढ़ चुका है, जिसे कंपनियों ने ग्राहकों पर डाल दिया है.

    विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबी यानी किंग साइज सिगरेट पीने वालों को सबसे ज्यादा झटका लगा है. 75 से 85 मिमी लंबाई वाली सिगरेट की उत्पादन लागत में 22% से 28% तक की बढ़ोतरी हुई है. इसके चलते प्रति सिगरेट ₹2 से ₹3 तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है. आमतौर पर कीमत बढ़ने से बिक्री पर असर पड़ता है, लेकिन सिगरेट के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है. विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू कंपनियों के पास “प्राइसिंग पावर” होती है. सिगरेट की लत के कारण उपभोक्ता बढ़ी हुई कीमत के बावजूद खरीद जारी रखते हैं. यही वजह है कि कंपनियां टैक्स बढ़ने के बावजूद अपने मुनाफे को बनाए रखने में सफल रहती हैं.

    एक्साइज ड्यूटी एक अप्रत्यक्ष कर है, जो देश के भीतर बनने वाले उत्पादों पर लगाया जाता है. सरकार अक्सर सिगरेट और शराब जैसे उत्पादों पर यह टैक्स बढ़ाती है ताकि इनके उपयोग को कम किया जा सके और राजस्व में वृद्धि हो. सिगरेट की बढ़ी हुई कीमतें अब पूरी तरह लागू हो चुकी हैं, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है. जहां एक ओर सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा और कंपनियों का मुनाफा सुरक्षित रहेगा, वहीं दूसरी ओर आम लोगों के खर्च में बढ़ोतरी साफ नजर आ रही है. हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में यह उछाल कुछ लोगों को धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकता है.



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