स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले सिलेंडर बम को सेना ने किया डिफ्यूज, तेज धमाके से थर्राया इलाका, देखें वीडियो

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले में स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले सिलेंडर बम को सेना ने बुधवार सुबह सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज कर दिया. यह बम बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपोड़ा गांव के पास नदी किनारे मिला था. सुरक्षा एजेंसियां गांव में डेरा डाले हुए थी. सेना की टीम ने एहतियात के तौर पर करीब एक किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह घेर लिया था. ताकि कोई भी व्यक्ति वहां न पहुंच सके और किसी तरह की अनहोनी न हो. काफी सावधानी बरतते हुए बम को निष्क्रिय किया गया. इस दौरान तेज धमाका हुआ. धुएं का गुब्बार करीब 50 फीट तक उठा. बम डिफ्यूज होने के बाद आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस की. इस दौरान बहरागोड़ा पुलिस भी मौके पर मौजूद रही. बहरागोड़ा थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि सी ने बम को निष्क्रिय कर दिया है. 

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    15 अप्रैल को मिला था बम
    नदी में मछली पकड़ने गए मछुआरों को 15 अप्रैल की शाम  स्वर्णरेखा नदी सिलेंडर बम मिला था. बम जाल में फंस गया था. जिसे ग्रामीण नदी किनारे तक ले कर आए थे. इसके बाद सुरक्षा को लेकर सेना ने पूरे इलाके को सील कर दिया था. वहां किसी के भी आने जाने पर रोक लगाई गई थी. सारी तैयारियां पूरी होने के बाद और उच्च अधिकारियों का क्लीयरेंस मिलने के बाद बुधवार की सुबह बम को डिफ्यूज कर दिया गया. बम को करीब 10 फीट का गड्ढा कर उसमें डाला गया. इसके बाद बम को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की गई. सेनानी बम को इतनी दक्षता से निष्क्रिय किया कि किसी जान माल का नुकसान नहीं पहुंचा.

    2 बम पहले भी किए गए थे डिफ्यूज
    बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के बरागाड़िया पंचायत के पानीपोड़ा गांव में नदी किनारे 17 मार्च को भी एक बम बरामद किया गया था. वहीं, 24 मार्च को एक अमेरिकन बम बरामद हुआ था। सेना और पुलिस की निगरानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 25 मार्च को सेना में इन दोनों बम को डिफ्यूज किया था. इसमें एक अमेरिकन बम 227 किलो का था.

    सेकेंड वर्ल्ड वॉर का है बम
    पानीपोड़ा गांव में स्वर्णरेखा नदी किनारे मिला सिलेंडर बम द्वितीय विश्व युद्ध के समय का बताया जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार यह काफी पुराना विस्फोटक है, जो संभवतः युद्धकाल के दौरान यहां पहुंचा था. जानकारी हो कि बहरागोड़ा से सटे चाकुलिया एयरपोर्ट का इस्तेमाल सेकेंड वर्ल्ड वॉर में हुआ था. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ल्ड वॉर के दौरान ही बमों को स्वर्णरेखा नदी के किनारे सुरक्षित रखा गया होगा. जो अब धीरे-धीरे बाहर आ रहा है.



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