TATA STEEL:पुजारी परिवार में जन्मा लड़का कैसे बन गया विश्व के सबसे बड़े स्टील कंपनी का संस्थापक, पढ़िये खास रिपोर्ट

    TATA STEEL:पुजारी परिवार में जन्मा लड़का कैसे बन गया विश्व के सबसे बड़े स्टील कंपनी का संस्थापक, पढ़िये खास रिपोर्ट

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):टाटा स्टील विश्व का ऐसा उद्योग घराना है,जिस पर हर किसी को विश्वास है. पिछले 118 सालों से यह अपने बुलंदियों को छू रहा है. इसके पीछे कई लोगों की मेहनत और संघर्ष की कहानी जुड़ी हुई है. टाटा ग्रुप देश ही नहीं विदेशो में भी पूरी सफलता के साथ कारोबार कर रहा है. यह भारत के सबसे बड़े व्यापारिक घरानों में से एक है, जिसकी सालाना कमाई 33 लाख करोड़ से भी अधिक है. कंपनी की स्थापना जमशेदजी टाटा ने 1907 में की थी. जो आज 150 देशों में व्यापार करता है.टाटा पर पूरे देश का विश्वास है. टाटा का ब्रांड भरोसे और विश्व विश्वास का दूसरा नाम है.टाटा का नाम सुनते ही लोगों में एक विश्वास जागृत होता है जो इस कंपनी के लिए गर्व की बात है.

    कंपनी के नाम से ही बस गया शहर

    टाटा स्टील को भले ही आज विश्व भर में पहचान मिल चुकी है लेकिन इसके संस्थापक नसरवानजी टाटा ने जब इसकी शुरुआत की थी तो उन्हें भी अंदाज़ा नहीं था कि उनकी मेहनत इतनी रंग लाएगी उनकी कंपनी के नाम से ही एक शहर बस जाएगा.सबसे बड़ी बात यह है कि टाटा स्टील आज भले ही करोड़ो का टर्नओवर मुनाफा कमाती हो लेकिन इसकी शुरुआत महज़ 21000 रुपये से से हुई थी. टाटा स्टील के पहले संस्थापक जमशेदजी टाटा नवसारी के मूल निवासी थे और मूल रूप से दस्तूर परिवार यानी पुजारी परिवार में जन्में थे, लेकिन दस्तूर की जगह वह अपना सरनेम टाटा लगाते थे. इसके पीछे की  कहानी काफी दिलचस्प है. आज हम आपको बतानेवाले हैं कि क्यों जमशेदजी टाटा दस्तूर की जगह टाटा सरनेम लगाते थे और इसको ये सरनेम कैसे मिला.

    जमशेदजी मूल रूप से पुजारी परिवार में जन्में थे

    मनी कंट्रोल रिपोर्ट की मानें तो नवसारी में रहनेवाले पारसी समुदाय के लोग पारस से आए. पारसियों का पहला जत्था गुजरात की संजान में आया था. बताया जाता है कि साल 1122 में पहली बार पारसी नवसारी आए थे. उसी साल पारसी पुजारियों का एक दल भी नवसारी आया था. जिसमे जमशेदजी के पूर्वज भी शामिल थे. भले जमशेदजी को आज लोग टाटा के नाम से जानते हैं लेकिन आपको हम बताये कि जमशेदजी मूल रूप पुजारी परिवार में जन्में थे और इनका सरनेम दस्तूर था,तो फिर जमशेदजी क्यों टाटा सरनेम लगाते थे.

    पढ़े टाटा सरनेम पड़ने का रोचक किस्सा

    जानकार बताते हैं कि जमशेदजी के पूर्वज गर्म मिजाज के थे. गुजराती में गर्म दिमाग वाले को टाटा कहा जाता है. जैसे किसी को गर्म मिजाज व्यक्ति को कहा जाएगा कि उसका स्वभाव बहुत टाटा है. जमशेदजी के परिवार को स्वाभाव की वजह से सब टाटा कहते थे, जिसके बाद उनका सरनेम ही टाटा हो गया.

    स्टील से मजबूत हमारा विश्वास हो ! 

    कंपनी का स्लोगन है कि स्टील से मजबूत हमारा विश्वास हो टाटा कंपनी की स्थापना लगभग 118 साल पहले हुई थी जो आज भी अपने विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है टाटा कंपनी का एक ही उद्देश्य है कि विश्वास के साथ कोई समझौता ना किया जाए. कंपनी का स्लोगन है कि स्टील से मजबूत हमारा विश्वास हो. आज चाय की चुस्की से लेकर सब्जी में पड़ने वाले नमक तक और बड़ी-बड़ी गाड़ियों के निर्माण में टाटा स्टील पूरे दमखम के साथ करता है.कंपनी छोटी छोटी बातों को भी नज़रअंदाज़ नहीं करती है और जो उसकी ख़ासियत है.

    हर साल दुल्हन की तरह सजता है पूरा शहर

    आपको बता दे कि टाटा स्टील के नीव रखने वाले जमशेदजी नसरवानजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1939 को हुआ था.टाटा स्टील से जमशेदपुर की पहचान होती है. वही झारखंड को भी इसके नाम नाम से जाना जाता है. हर साल 3 मार्च के दिन पूरी लौहनगरी को दुल्हन की तरह सजाया जाता है.वही साकची स्थित जुबली पार्क को भी पूरी तरह से इलेक्ट्रिक लाइट से सजाया जाता है.3 मार्च के दिन जैसे ही आप शहर में निकलेंगे आपको ऐसा लगेगा जैसे पूरा शहर रोशनी में नहा रहा हो.

    10 से 15 दिन पहले से ही शुरू हो जाती है तैयारी

    3 मार्च को लेकर जमशेदपुर में हर साल धूम देखने को मिलती है. वहीं 10 से 15 दिन पहले से इसकी तैयारी शुरू कर दी जाती है. जहां टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से शहर में स्थिति सभी पार्क को सजाया सवारा जाता है. पूरा शहर ऐसा लगता है मानो जगमगा रहा है. दरअसल जमशेदजी नसरवानजी टाटा को प्रकृति से काफी ज्यादा लगाव था यही वजह है कि उनके नाम से कई पार्क शहर में स्थापित हैं जहां लोग घूमना पसंद करते है.


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news