Russia-Ukraine War: युद्ध के कारण 40 लाख बच्चे हुए गरीबी के शिकार, UNICEF के आंकड़ों ने चौकाएं    

    Russia-Ukraine War: युद्ध के कारण 40 लाख बच्चे हुए गरीबी के शिकार, UNICEF के आंकड़ों ने चौकाएं    

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी महीने से ही युद्ध जारी है. इस युद्ध में ना जाने कितने सैनिक शहीद हो गए, कितने शहर बर्बाद हो गए. मगर, युद्ध का अबतक कोई नतीजा नहीं निकला. युद्ध आज भी चल रहा है और नेताओं के बयान से तो कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि कहीं तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत ना हो जाए. मगर, इस युद्ध ने सिर्फ इन दोनों देशों को ही मुसीबत में नहीं डाला है, बल्कि दुनिया के बाकी देश भी इससे अछूते नहीं हैं. इसका सबसे बुरा असर उन बच्चों पर पड़ा है, जो किसी भी देश के भविष्य माने जाते हैं. UNICEF ने जो ताजा आंकड़ा जारी किया है वह बेहद सोचने पर मजबूर करने वाला है.   

    चार मिलियन बच्चे गरीबी रेखा के नीचे

    संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी UNICEF ने अब तक रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित बच्चों की संख्या का खुलासा किया है. समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, इसमें कहा गया है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और इसके परिणामस्वरूप आर्थिक गिरावट ने पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में चार मिलियन बच्चों को गरीबी में डाल दिया है. एक आधिकारिक बयान में, यूनिसेफ ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के कारण हुए आर्थिक संकट का सबसे भारी बोझ बच्चे उठा रहे हैं. यूनिसेफ ने 22 देशों के आंकड़ों के अध्ययन से यह निष्कर्ष निकाला है.

    सबसे ज्यादा रूस और यूक्रेन के बच्चे

    एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार इस साल फरवरी में अपने पड़ोसी देश पर मास्को के हमले के बाद से रूसी और यूक्रेनी बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. यूनिसेफ ने पाया कि यूक्रेन युद्ध के कारण गरीबी में रहने वाले बच्चों की संख्या में कुल वृद्धि का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा रूस में है और पूरे क्षेत्र में इस संकट के कारण अब अतिरिक्त 2.8 मिलियन बच्चे गरीबी रेखा के नीचे आ गए हैं. इस 2.8 मिलियन अतिरिक्त बच्चों के गरीबी रेखा में पहुंचने से रूस इस लिस्ट में टॉप पर है. वहीं आधे मिलियन के साथ यूक्रेन दूसरे नंबर पर है. वहीं 1,10,000 बच्चों के साथ रोमानिया इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर है.

    एएफपी ने बताया कि यूरोप और मध्य एशिया के लिए यूनिसेफ के क्षेत्रीय निदेशक अफशान खान ने कहा कि इस युद्ध की भयावह स्थिति में पूरे क्षेत्र में बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि अगर हम अभी इन बच्चों और परिवारों का समर्थन नहीं करते हैं, तो बाल गरीबी में तेजी से वृद्धि का मतलब लगभग निश्चित रूप से उनकी जान, उनकी शिक्षा और उनका भविष्य खोना होगा और ये होना बहुत ही बुरा साबित होगा.  

     


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