टीएनपी डेस्क (TNP DESK): प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के वरिष्ठ नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ का निधन हो गया है. प्रशांत बोस ने शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में अंतिम सांस ली. निधन के बाद जेल प्रशासन ने उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया है.
प्रशांत बोस संगठन के शीर्ष नेताओं में शामिल थे और उन्हें महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था. वे भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाते रहे.
नक्सली संगठन में ‘किशन दा’ के नाम से पहचान रखने वाले बोस मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी थे. उन्होंने कई वर्षों तक संगठन की गतिविधियों का नेतृत्व किया और रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई.
उनका शुरुआती जुड़ाव माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) से था, जहां वे प्रमुख पद पर रहे. वर्ष 2004 में जब एमसीसीआई और पीपुल्स वार ग्रुप (PWG) का विलय हुआ और भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ, तब उन्हें नए संगठन के पोलित ब्यूरो में शामिल किया गया.
प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले से उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था. उस समय उन पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जो उनकी संगठन में अहमियत को दर्शाता है.
करीब 75 वर्ष से अधिक आयु के बोस लंबे समय से जेल में बंद थे. उनकी मौत के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं, क्योंकि वे संगठन के महत्वपूर्ण और रणनीतिक नेता माने जाते थे.
Thenewspost - Jharkhand
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