ट्विन टावर तो हो गया ज़मींदोज़, उसके गुबार के साथ उठने लगे कई सवाल- जानिये क्या-क्या

    ट्विन टावर तो हो गया ज़मींदोज़, उसके गुबार के साथ उठने लगे कई सवाल- जानिये क्या-क्या

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बीते दिन 9-10 सेकेंड में भर-भराकर गिर गई महज़ वो बहुमंजिला इमारत नहीं थी, उसके पीछे भ्रष्टाचार की एक लंबी कहानी थी, अब उस कहानी को लोग सुनेंगे और सुनाएंगे. जिसमें कई सवाल होंगे. बात राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के नोएडा की है. उस ट्विन टावर को जमींदोज़ करने में 3700 किलोग्राम से अधिक विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया.  इस बुलडोजरी टीम में 7 विदेशी विशेषज्ञ समेत 10 सदस्य शामिल थे. इसके अलावा 20-25 लोग एडिफिस इंजीनियरिंग थे. हम आपको उठ रहे सवालों से रूबरू कराएंगे। इससे पहले इसको गिराए जाने की वजह बताते हैं.

    क्यों तोड़ा गया टावर

    आरोप है कि इन टावरों को सरकारी शर्तों का उल्लंघन कर बनाया गया था. इसका निर्माण 2009 में हुआ था. दोनों टावरों में 950 से ज्यादा फ्लैट्स बनाए जाने थे. प्लान में बदलाव करने का आरोप लगाते हुए कई खरीदार 2012 इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए थे. इसमें 633 लोगों ने फ्लैट बुक कराए थे. जिनमें से 248 पैसे वापस ले चुके हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्विन टावर को अवैध घोषित करते हुए उन्हें गिराने का आदेश दे दिया था. यह 2014 की बात है. नोएडा प्राधिकरण को अदालत ने फटकार भी लगाई थी . मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो उसने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी ही इसे गिराने का आदेश दे दिया. अब पढ़िये टावर के ढहाने के बाद क्या-क्या हुआ और क्या-क्या हो सकता है.

    जमा हो गया हजारों टन मलबा

    वरिष्ठ पत्रकार व ईयू-एशिया न्यूज के दिल्ली संपादक पुष्परंजन बताते हैं, ट्विन टावर गिरने से करीब 60 से 80 हजार टन मलबा इकट्ठा हो गया है. आसपास की 50 से ज्यादा इमारतें पूरी तरह से धूल से पट गईं. पास की दो सोसायटी में चहारदीवारी क्षतिग्रस्त हुई है. धमाका इतना तेज था कि फरीदाबाद फ्लाईओवर तक कांप उठा. नोएडा अथॉरिटी की सीईओ ऋतु महेश्वरी ने बताया कि इन मलबे के हटाने में तीन महीने लगेंगे. मलबे का ज्यादा हिस्सा यहीं पर यूज हो जाएगा, जबकि कुछ यहां से हटा दिया जाएगा.

    …. तो टीबी और कैंसर की आशंका

    वह कहते हैं, सीमेंट, महीन रेत, बजरी, मिट्टी की ईंटें, चूना, तांबे के तार, पीवीसी नाली और विस्फोटक के कण कई स्वास्थ्य खतरों को भी जन्म देंगे. आंखों में जलन, नाक, मुंह और श्वसन तंत्र अस्थायी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनसे लोगों को सामना करना पड़ सकता है. यदि लंबे समय तक धूल और मलबे को साफ करने की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो टीबी, कैंसर, पेट के अल्सर, हृदय रोग आदि जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. शनिवार को चिकित्सकों के एक समूह ने ट्विन टावर के बगल की दो सोसायटी के 50 लोगों का पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) कराया है. अब बुधवार को फिर से इनकी जांच होगी. इससे मालूम चलेगा कि टावर गिरने के बाद हुए प्रदूषण का लोगों के शरीर पर क्या असर पड़ा है. कोई जादू नहीं है कि हवा से धूल-मिटटी 24 घंटे में ग़ायब हो जाए. सच छुपाया जा रहा है. पुलिस वालों को मास्क दिये गए थे, मगर वहां उपस्थित जनता बिना किसी मास्क के सेल्फी लेने में व्यस्त थी.

    ध्वस्त करने की बजाय अधिग्रहित कर लेती सरकार

    पत्रकार प्रदीप पाल कहते हैं कि माना कि टावर का जन्म नाजायज था, पर सच यह भी है कि नाजायज औलादों के जन्म में उनकी अपनी कोई गलती नही होती. कूड़े के ढेर में पाये जाने के बावजूद हमारा सभ्य समाज भले ही अनाथालय में पालता है, पर पाल लेता है, फांसी पर नहीं चढ़ाता. कुछ लोग उपेक्षा की नजर से देखते हैं, तो कुछ ऐसी भी दम्पती होते हैं, जो इन्हे गोद ले लेते हैं. बिल्डिंग बनाने में बिल्डर, नोएडा विकास प्राधिकरण के आला अफसर और इनकी नियुक्ति करने वाले मंत्रियों ने  भी भूमिका निभायी. सजा देनी थी, उनको सजा देते, कड़ी से कड़ी से सजा देते. अधिग्रहित कर लेते। सरकारी दफ्तर बना लेते. स्कूल या अस्पताल बना देते.


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