मुजफ्फरपुर: सिपाही कविता की रहस्यमय मौत का जिम्मेवार कौन- दो राज्यों की पुलिस क्यों है जांच में जुटी जानिये

    मुजफ्फरपुर: सिपाही कविता की रहस्यमय मौत का जिम्मेवार कौन- दो राज्यों की पुलिस क्यों है जांच में जुटी जानिये

    मुजफ्फरपुर(MUZAFFARPUR): बिहार पुलिस की सिपाही कविता कुमारी एक मामले की जांच के लिए महाराष्‍ट्र के शहर पुणे गई थी. 8 अगस्त को मुजफ्फरपुर की ब्रह्मपुरा थाने से चार पुलिसकर्मियों की टीम को पुणे भेजा गया था. टीम में एक आईओ दो सिपाही के साथ ये एक अकेली महिला सिपाही थी. मामला 94 लाख रुपए के गबन से जुड़ा था. लेकिन, वहां जाने के बाद कविता लौटकर नहीं आ सकी. बता दें कि पुणे के एक होटल में कविता का शव मिला था. इसके बाद पुणे से कविता का शव बिहार लाया गया और उसके ससुराल में उसका अंतिम संस्कार किया गया. लेकिन कविता की मौत कैसे हुई इस बात की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझी है. इस मामले में परिवार के दावे से कई सवाल खड़े हो गए हैं. पूरा मामला बिहार के मुजफ्फरपुर जिला के ब्रह्मपुरा थाने से जुड़ा है. इस मामले अब पुणे और बिहार की पुलिस छानबीन कर रही है. 

    यह है मामला 

    जानकारी के अनुसार पूरी टीम को पुणे भेजा गया था. कविता की परिजनों से 11 तारीख की सुबह तक बात हुई थी. दोपहर तक जब बात नहीं हुई तो पिता ने शाम 4 बजे फोन किया. जिसके बाद उसके आईओ ने बताया कि उसने सुसाइड कर लिया है.  घर परिवार में ऐसी कोई स्थिति परिस्थिति नहीं थी जिससे वो सुसाइड कर ले. कविता लगभग दो महीने की गर्भवती थी. परिजनों का आरोप है कि उनके पहुंचने से पहले ही साथ गए आईओ ने सुसाइड का मामला दर्ज करा दिया. कविता के पिता और पति जब पुणे पहुंचे और बयान दर्ज कराना चाहा तो बयान दर्ज नहीं किया गया. कविता के पति ने कहा है कि एक महिला को तीन पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ भेजा जाना कहां तक उचित था. उन्होंने कहा कि जब हमलोग पुणे पहुंचे तो पुणे पुलिस ने फोटो वीडियो हमें दिखाया.  उसमें कविता का पैर बेड से सटा हुआ था. कविता के पति ने पूरे मामले की जांच की मांग की है. वहीं कविता के चाचा वीरेश कुमार साफ तौर पर कहते हैं कि कविता आत्महत्या नहीं कर सकती थी. वह एक अच्छे परिवार की जांबाज लड़की थी. पूरे मामले की जांच होनी चाहिए.  

    कविता की मौत पर पति और परिजनों ने उठाए सवाल

    कविता के साथियों ने भी कई तरह के सवाल उठाते हुए पूछा है कि बन्द दरवाजे को खोलने से लेकर शव उतारने तक का कोई वीडियोग्राफी क्यों नहीं कराया गया ? दूसरा सवाल बिना परिजनों के आए आई ओ ने पुणे पुलिस को आवेदन कैसे दे दिया. फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठना लाजिमी है. ब्रह्मपुरा पुलिस की जो टीम पुणे गई थी उसमें एक भी पदाधिकारी ऐसे नहीं थे जिन्हें हवाई जहाज से यात्रा करने की अनुमति पुलिस मैन्युअल देता हो. जबकि पूरी टीम स्पाइस जेट से पटना से पुणे गई थी.

    -दूसरा सवाल तीन पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ एक गर्भवती महिला पुलिसकर्मी को कैसे भेजा गया. जबकि गर्भवती सिपाही को खुद एक महिला साथीदार की जरूरत थी. 

    -तीसरा सवाल किसको बचाने के लिए बिना परिजनों के पहुंचे आईओ ओमप्रकाश ने पुणे पुलिस को आवेदन देकर यू डी केस दर्ज करवा दिया.  

    -चौथा सवाल पोस्टमार्टम कराने के लिए तीन दिनों का समय क्यों बिताया गया. 

    क्या कविता के साथ कोई अनहोनी हुई थी ? साथी,पति और परिजनों के सवाल पर पुलिस प्रशासन मौन है या चुप्पी साधकर किसी गुनहगार को बचाने में जुटी है.


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