विधानसभा में मंत्री बादल पत्रलेख की गर्जना “हेमंत है तो हिम्मत है” अवैध खनन मामले में रेलवे मिनिस्टर को लिखे गये पत्र का अब तक क्यों नहीं मिला जवाब?

    विधानसभा में मंत्री बादल पत्रलेख की गर्जना “हेमंत है तो हिम्मत है” अवैध खनन मामले में रेलवे मिनिस्टर को लिखे गये पत्र का अब तक क्यों नहीं मिला जवाब?

    रांची(RANCHI)- राज्य में अवैध खनन के मामले को उछाकर हेमंत सोरेन की सरकार को घेरने की रणनीति पर पलटवार करते हुए मंत्री बादल पत्रलेख ने अब सीएम हेमंत के द्वारा रेलवे मंत्रालय को लिखे गये पत्र को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है.

    मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा है कि यह सीएम हेमंत ही थे, जिनके द्वारा झारखंड में पूर्ववर्ती सरकारों के द्वारा खनन की लूट के मामले को उजागर किया गया था, इसके साथ ही खनन की इस लूट में रेलवे के बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की जांच के लिए रेलवे मंत्री को एक पत्र भी लिखा गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश आज तक केन्द्रीय रेलवे मंत्री ने सीएम हेमंत के उस पत्र का जवाब देना उचित नहीं समझा और इसके कारण पूर्ववर्ती सरकारों के द्वारा खनन लूट और उसमें रेलवे अधिकारियों की संलिप्तता का खुलासा आज तक नहीं हो सका.

    भाजपा विधायक बिरंचि नारायण ने उठाया था खनन लूट का मामला

    यहां यह बता दें कि मंत्री बादल पत्रलेख भाजपा विधायक बिरंचि नारायण के सवालों का जवाब दे रहे थें. विधायक बिरंचि नारायण ने आज सदन में अवैध खनन का मामला उठाते हुए यह दावा था कि इन तीन सालों में पूरे झारखंड से अवैध खनन के संकड़ों मामले आये, लेकिन किसी भी मामले की जांच नहीं हुई, इन तीन वर्षों में झारखंड में  करीबन 20000 करोड़ रुपये का अवैध खनन किया गया.

    लेकिन बिरंचि नारायण के सभी आरोपों को एक एक कर खारिज करते हुए मंत्री बादल पत्रलेख ने दावा किया कि हेमंत सरकार के काल में रघुवर शासन काल की तुलना में करीबन तीन गुणा ज्यादा राजस्व की वसुली हुई, रघुवर सरकार में 3 वर्षों में महज 15784 करोड़ रुपए राजस्व की प्राप्ति हुई थी, जबकि हमारी सरकार में तीन सालों में करीबन 30949 करोड़ रुपये राजस्व की वसुली की है, लेकिन बावजूद इसके विपक्ष हमें निशाना बना रहा है.

    विपक्ष पर बिफरे मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि ‘हेमंत है तो हिम्मत है’. विपक्ष में हिम्मत है तो उस चिट्ठी का जवाब ले आइए जो सीएम हेमंत ने रेल मंत्री को लिखा है. आखिर क्या कारण है कि आज तक रेलवे मंत्री ने सीएम हेमंत के पत्र का जवाब नहीं दिया, उस चिट्ठी में साफ लिखा है कि झारखंड में अवैध खनन के मामले में रेलवे के बड़े अधिकारियों की संलिप्तता थी, उनकी मिलीभगत से झारखंड से अवैध रुप से खनन को बाहर भेजा जा रहा था, लेकिन आज तक ना तो उस चिट्ठी का जवाब आया और ना ही रेलवे के उन अधिकारियों की  भूमिका की जांच की गयी. बावजूद विपक्ष यहां सवाल खड़े कर रहा हैं.


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