Jewellery Market Crash: चांदी ने निवेशकों और मुनाफाकारों की तोड़ी कमर! तीन दिनों में आधी रह गई कीमत, सोना पर भी आफत, देखिए 3 दिनों का टाइम लाइन


टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बीते दिनों सोने चांदी के दामों में हुए उतार चढ़ाव ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है की आखिर इन कीमती धातुओं में पैसे लगाना मुनाफा देगा या नुकसान ? यही सवाल हर इन्वेस्टर के मन में चल रहा है की आखिर अचानक से चाँद पर पहुँचने वाली चांदी कैसे धड़ाम से नीचे गिर गई और अब आगे क्या होने वाला है ?
दरअसल फरवरी 2026 की शुरुआत निवेशकों के लिए किसी झटके से कम नहीं थी. वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में सख्ती के चलते सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली. खासकर चांदी की कीमतों में बीते तीन दिनों ऐसी गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों और सट्टा कारोबारियों को गहरे नुकसान में डाल दिया. बाजार के जानकार इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट में से एक मान रहे हैं.
ऐसे में तीन दिनों के भीतर चांदी के दामों में करीबन एक लाख रुपये का फरक देखा गया है. जबकि सोने की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. सोने में आई गिरावट को 1980 के बाद की सबसे बड़ी गिरावटों में गिना जा रहा है. इस अचानक आए बदलाव से न केवल निवेशकों की चिंता बढ़ी है, बल्कि ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोग भी असमंजस की स्थिति में हैं की आखिर आगे क्या होगा ?
तीन दिनों में कैसे टूटा बाजार ?
पहला दिन – दबाव की शुरुआत:
गिरावट की शुरुआत उस समय हुई, जब अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में करीब 0.8 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई. डॉलर के मजबूत होने का सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए महंगे हो जाते हैं. इसी दिन से बाजार में दबाव के संकेत मिलने लगे थे.
दूसरा दिन – भारी बिकवाली
इसके बाद अगले दिन बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली. 30 जनवरी 2026 के आसपास गोल्ड फ्यूचर में एक ही दिन में करीब 11 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट ऐतिहासिक मानी जा रही है. चांदी में भी इसी दौरान तेज गिरावट आई, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई और मुनाफावसूली का दौर तेज हो गया.
तीसरा दिन – अनिश्चितता का माहौल
3 फरवरी 2026 तक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है. देश के कुछ शहरों, जैसे चेन्नई में चांदी की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बताई जा रही हैं, लेकिन वैश्विक संकेत कमजोर बने हुए हैं. निवेशक भविष्य को लेकर असमंजस में हैं और सतर्क रुख अपना रहे हैं.
क्यों हुई गिरावट
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे अहम वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है. डॉलर के मजबूत होने से सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग कमजोर पड़ जाती है. इसके अलावा, अमेरिका समेत कई देशों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों का रुझान बदला है. ऊंची ब्याज दरों के माहौल में निवेशक सोना-चांदी के बजाय बॉन्ड और अन्य सुरक्षित विकल्पों की ओर झुकते हैं.
बाजार में आगे को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि 2026 की चौथी तिमाही तक सोने की कीमतों पर और दबाव आ सकता है. इसी आशंका के चलते निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं.
कुल मिलाकर, सोना और चांदी दोनों ही इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत और केंद्रीय बैंकों की नीतियां ही तय करेंगी कि बाजार संभलता है या गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहता है.
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