कचरे को बनाया कमाई का जरिया, जमशेदपुर की महिलाएं बनीं मिसाल

    कचरे को बनाया कमाई का जरिया, जमशेदपुर की महिलाएं बनीं मिसाल

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): जमशेदपुर के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अब वेस्ट टू वेल्थ मॉडल के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं. जो प्लास्टिक और पुराने कपड़े पहले बेकार समझकर फेंक दिए जाते थे, वही अब इन महिलाओं के हुनर से खूबसूरत और उपयोगी उत्पादों में बदल रही हैं. इस पहल ने न सिर्फ महिलाओं की आमदनी बढ़ाई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा योगदान दिया है. पटमदा क्षेत्र की महिलाओं ने इस असंभव काम को कर दिखाया है. पटमदा के गोबरघूसी, बुरुडीह समेत अन्य गांव की करीब 2 दर्जन से अधिक महिलाएं इस पहल से जुड़ी हैं. महिलाओं के इस हुनर की गांव-गांव में चर्चा हो रही है. ये महिलाएं मिलकर प्लास्टिक और पुराने कपड़ों से बैग, टोकरी, फूलदानी, टोपी, डेकोरेटिव आइटम जैसे कई आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं. खास बात यह है कि हर महिला हर महीने कम से कम 5 हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है.

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    महानगरों तक है उत्पाद की डिमांड
    महिलाओं द्वारा बनाए गए इन उत्पादों की मांग अब स्थानीय स्तर से निकलकर महानगरों तक पहुंच चुकी है. दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े बाजारों में ये हैंडमेड और इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स 50 से 600 रुपए तक में बिक रहे हैं. शहरी ग्राहकों के बीच इनकी खास पहचान बन चुकी है, जिससे महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है. महिलाएं गांव-गांव घूम कर सड़क किनारे फेंके कुरकुरे चिप्स आदि की प्लास्टिक को इकट्ठा करती हैं और इसे साफ कर आकर्षक उत्पाद बना रही हैं. महिलाएं रोजाना करीब 10 किलो प्लास्टिक और कपड़े का कचरा इकट्ठा कर उसे साफ कर उपयोग में लाती हैं. हर महीने लगभग 50 से 55 किलो कचरे को रिसायकल कर उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है. 

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    महिलाओं ने लिया है प्रशिक्षण
    इस बदलाव के पीछे आसरा संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है. संस्था महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें वेस्ट मटेरियल से नए-नए डिजाइन के उत्पाद बनाना सिखाती है. प्रशिक्षण के बाद तैयार सामान संस्था खुद महिलाओं से खरीदती है और बड़े बाजारों में बेचती है. बिक्री से मिलने वाली राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है. पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी इस पहल का अहम हिस्सा है. पटमदा की ये महिलाएं आज यह साबित कर रही हैं कि अगर सोच और हुनर हो, तो कचरा भी कमाई का मजबूत साधन बन सकता है. आसरा संस्था के स्टेट हेड सत्यजीत कुमार ने बताया कि संस्था इन महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को खरीदकर दिल्ली और मुंबई के हाट बाजारों में बेचती है. वहां इनकी अच्छी मांग है. उत्पाद बिकने के बाद उसकी राशि सीधे संबंधित महिलाओं के खातों में जमा कर दी जाती है. 

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