मेडिकल स्टोर खोलने का है प्लान, तो लाइसेंस के लिए किन जरूरी दस्तावेजों की पड़ेगी जरुरत, पढ़ें जरूरी बात


टीएनपी डेस्क(TNP DESK): शेयर बाजार के इस दौर में अगर सबसे स्थिर और सुरक्षित बिजनेस की बात की जाए तो वह मेडिकल सेक्टर है. शेयर बाजार ऊपर जाए या नीचे बाजार मंदा हो या महंगाई बढ़े दवावों की जरुरत हर वक्त लोगों को होती है यही वजह है कि आजकल के दौर में लोग मेडिकल स्टोर खोलना सबसे अच्छा विकल्प मानते है. हलांकी मेडिकल स्टोर खोलना एक बिजनेस ही नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी होती है क्योंकि अगर आपको दवावों की सही जानकारी नहीं है तो आप लोगों की मौत की वजह बन सकता है, यही वजह है कि मेडिकल स्टोर को लेकर सरकार की ओर से कई कडे नियम बनाये गए है जिसका पालन करना काफी ज्यादा जरूरी है.
पढ़ लें जरूरी बात
यदि आप भी मेडिकल स्टोर खोलना चाहते है तो आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान जरूर देना पड़ेगा, जो आपके बिजनेस को ग्रोथ देगा.आपको बता दें कि अन्य बिजनेस की तरह मेडिकल स्टोर खोलना आसान नहीं है क्योंकि इसके लिए आपको पहले सरकार से इसका लाइसेंस लेना पड़ता है इसमे किन-किन दस्तावजों की जरूरत पड़ती है आज हम आपको बताने वाले है.
किस तरीके का खोलना चाहते है मेडिकल स्टोर
मेडिकल स्टोर खोलने से पहले आपको पहले यह तय करना होगा कि आप किस तरह का मेडिकल स्टोर खोलना चाहते है.दरअसल अस्पताल के अंदर खुलने वाला मेडिकल स्टोर मरीजों की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है. वहीं रिहायशी इलाकों में खुलने वाला इंडिपेंडेंट मेडिकल स्टोर होता है.इसके साथ ही आजकल मॉल और कमर्शियल एरिया में भी मेडिकल स्टोर खुलते हैं जो चेन फार्मेसी और फ्रेंचाइजी आउटलेट पर आधारित होते है. इसके साथ टाउनशिप मेडिकल स्टोर और सरकारी परिसरों में मौजूद मेडिकल शॉप भी अलग कैटेगरी में आते है.इसमें से आपको किस मॉडल का मेडिकल स्टोर खोलना है पहले तय करना है., इसके आधार पर ही आगे आपको इन्वेस्टमेंट, लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सही से हो पाता है.
इस अधिनियम के तहत होता है रजिस्ट्रेशन
जब भी आप मेडिकल स्टोर खोलेंगे तो आपके लिए रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा जो भारतीय फार्मेसी अधिनियम 1948 के तहत होता है. जिसके लिए आप जिस राज्य में भी रहते है के संबंधित विभाग में आवेदन देना होता है. जहां स्टेशन कराते समय आपको सबसे पहले निर्णय लेना है कि आपका मेडिकल किस फॉर्म में चलेगा.यदि आपकी कम पूंजी निवेश करके छोटा बिजनेस शुरू करना चाहते है तो ओनरशिप या पार्टनरशिप में खोल सकते है.
एलएलपी मॉडल है काफी ज्यादा लोकप्रिय
वही अगर आप बड़े स्तर पर पुंजी निवेश करके मेडिकल खोलना चाहते हैं तो आप बड़े अस्पताल या चेन फार्मेसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मॉडल को अपना सकते है. दरअसल हाल के समय में LLP मॉडल काफी ज्यादा लोकप्रिय है क्योंकि इसके तहत मेडिकल स्टोर खोलने पर पार्टनर्स को कानूनी सेफ्टी मिलती है.
बी.फार्मा या एम.फार्मा की डिग्री होनी जरुरी
आपको बता दे कि अगर आप खुदरा दवा लाइसेंस चाहते है तो आपके पास रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट यानी बी.फार्मा या एम.फार्मा की डिग्री होनी जरुरी है.यदि आपके पास नहीं है तो आपके पार्टनर के पास होना जरूरी है.इसके साथ ही सरकार की ओर से मेडिकल का क्षेत्र भी तय किया गया है.जहां कम जगह में आप मेडिकल स्टोर नहीं खोल सकते है.वही मेडिकल स्टोर में रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं भी तय की गई है.जिससे दवाओं को सही तापमान पर रखा जा सके. थोक लाइसेंस के लिए नियम थोड़े अलग होते है, हलाकि अगर आप थोक दवाइयो का बिजनेस करना चाहते है तो इसके लिए नियम अलग होते है.
इन दस्तावेज़ों की पडती है जरूरत
अब चलिए जान लेते हैं ड्रग लाइसेंस लेने के लिए आपको आवेदन के समय किन-किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है तो आपको बता दें कि इसमे तय फॉर्मेट में आवेदन पत्र, कवर लेटर, फीस का चालान, दुकान का नक्शा और ओनरशिप का सर्टिफिकेट शामिल होता है. इसके साथ ही बिजनेस रजिस्ट्रेशन से जुड़े डाॅक्यूमेंट, एफिडेविट और रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट से जुड़े डॉक्युमेंट भी जमा करने होते है.यदि आपने पंजीकरण के समय सभी दस्तावेज सही-सही दिए है तो आपको लाइसेंस मिलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.
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