क्या कांग्रेस के बैनर तले खड़ा होने को तैयार नहीं हैं प्रमुख विपक्षी दल, 30 जनवरी को श्रीनगर में भारत जोड़ो यात्रा के समापन पर कैसी होगी तस्वीर

    क्या कांग्रेस के बैनर तले खड़ा होने को तैयार नहीं हैं प्रमुख विपक्षी दल, 30 जनवरी को श्रीनगर में भारत जोड़ो यात्रा के समापन पर कैसी होगी तस्वीर

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): कन्याकुमारी से शुरू हुई भारत जोड़ो यात्रा का 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शहादत दिवस के अवसर पर श्रीनगर में समाप्त हो रही है. इस अवसर पर भव्य आयोजन के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के द्वारा देश के 23 दलों के अध्यक्षों और उनके प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया गया था. विपक्षी दलों को लिखे पत्र में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि आपकी उपस्थिति से सत्य, करुणा और अहिंसा के संदेश को मजबूती मिलेगी. सत्य, अहिंसा और करुणा का प्रचार और प्रसार इस यात्रा का अहम उद्देश्य था. मैं आप सबों को व्यक्तिगत रूप से इस यात्रा के समापन पर आमंत्रित करता हूं. धीरे-धीरे 30 जनवरी का समय नजदीक आता गया, लेकिन अभी तक कांग्रेस यह कह पाने की स्थिति में नहीं है कि इस

    भारत जोड़ो यात्रा की समाप्ति पर कितने दलों की भागीदारी रहेगी

    यहां बता दें कि कांग्रेस ने इस आयोजन के अवसर पर आप, बीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस, बीजद, एआईयूडीएफ और अकाली दल को आमंत्रित नहीं किया है, आमंत्रित किये गये प्रमुख नेताओं में ममता बनर्जी, अखिलेश यादव इस पर अपना पत्ता नहीं खोला है, लेकिन इंकार भी नहीं किया गया है. नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव में से किसी के शामिल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. अब तक  सीपीआई की ओर से भी इस आयोजन में शामिल होने की जानकारी दी गयी है, सीपीएम ने भी अपना पता नहीं खोला है.

    क्या राहुल के बढ़ते कद से विपक्षी दलों में भी बेचैनी है

    यह कहा जा सकता है कि कोई भी दल राहुल गांधी की यात्रा को लेकर उदासीन नहीं है, लेकिन हर इस बात का आकलन कर रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य स्तर पर उसका सीधा मुकाबला किसके साथ होने जा रहा है, ममता बनर्जी से लेकर आप, बीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस, बीजद, एआईयूडीएफ सभी इसी दुविधा के शिकार हैं.

    क्या प्रधानमंत्री पद को लेकर भी रस्साकशी

    जमीनी सच्चाई यह है कि आज  के राजनीतिक परिदृश्य में हर राजनेता की चाहत पीएम की कुर्सी है, सबकी मंशा दिल्ली तक पहुंचने की है. अरविंद केजरीवाल से लेकर ममता, चन्द्रशेखर और नीतीश कुमार का भी यही सपना है. जबकि अखिलेश यादव चाहते हैं कि राहुल गांधी इस बात की गांरटी ने कि वह यूपी में उनके लिए संकट नहीं बनेंगे, और यदि  दोनों के बीच कोई तालमेल भी होता है, तो सीटों की संख्या एक सीमा के अन्दर होगी.

    हर राजनीतिक दल राहुल गांधी की लोकप्रियता को समझ रहा है 

    लेकिन एक बात यह भी है कि हर राजनीतिक दल राहुल गांधी की लोकप्रियता को समझ रहा है, और साथ ही इस बात की भी समझ बन रही है कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर कोई लड़ाई लड़ सकता है तो वह कांग्रेस ही है. और कांग्रेस भी अब वह नहीं रही, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने उसे पूरी तरह बदल डाला है.

    रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार


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