यहां महिलाओं को प्रेग्नेंट करने पर मिलते हैं 10 लाख रुपये, ‘प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ की नौकरी में लोगों को मिला ऐसा ऑफर, जानकार माथा पीट लेंगे आप

    यहां महिलाओं को प्रेग्नेंट करने पर मिलते हैं 10 लाख रुपये,  ‘प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ की नौकरी में लोगों को मिला ऐसा ऑफर, जानकार माथा पीट लेंगे आप

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): कहते हैं की दुनिया में मां बनना सबसे बड़ा सुख है. पर आज के समय में अलग-अलग कारणों से कई महिलायें इस सुख से वंचित हैं. पर उन महिलाओं के मन में यह लालसा जरूर रहती है किसी तरह उन्हें मां बनने का सुख मिल सके. हालांकि अब देश दुनिया में कई ऐसी तकनीक उभर कर आई है जिनसे उन महिलाओं के मां बनने का सपना पूरा हो रहा है. पर कुछ दंपतियों के बीच बच्चे की चाह ऐसी है कि वह लोग माता-पिता बनने के लिए लाखों लाख रुपये मिलते हैं. पर क्या अपने कभी प्रेग्नेंट जॉब सर्विस के बारे में सुना है जहां महिलाओं को मां बनाने के लिए पुरुषण को 10 लाख रुपये लिए जाते हैं. यह बिल्कुल एक नौकरी की तरह है जहां महिलाओं को प्रेग्नेंट करने के लिए पुरुषों को मोहरा बनाया जाता था. 

    सुनकर अजीब लगा ना, पर यह कोई नौकरी नहीं बल्कि ठगी का नया तरीका है. दरअसल महिलाओं को मां बनाने के लिए 10 लाख रुपये फीस का झांसा देकर ठगी की जा रही थी. पुलिस ने सोशल मीडिया और फोन कॉल के जरिए चल रहे एक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का खुलासा किया है, जो फर्जी “प्रेग्नेंट जॉब सर्विस” के नाम पर देशभर के लोगों को अपना शिकार बना रहा था. इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य की तलाश जारी है. पूरा मामला बिहार के नवादा जिले से जुड़ा है. 

    पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह पुरुषों को यह लालच देता था कि वे निःसंतान या बांझ महिलाओं को गर्भवती कराकर 10 लाख रुपये तक कमा सकते हैं. इस ऑफर को सोशल मीडिया पोस्ट और कॉल के जरिए आकर्षक तरीके से पेश किया जाता था. झांसे में आए लोगों से पहले रजिस्ट्रेशन, मेडिकल प्रक्रिया, होटल खर्च और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर पैसे लिए जाते थे. एक बार रकम ट्रांसफर होने के बाद ठग नई-नई मांगें करते रहते थे और अंत में संपर्क पूरी तरह तोड़ दिया जाता था. 

    गिरोह सिर्फ पुरुषों को ही नहीं, बल्कि निःसंतान महिलाओं को भी निशाना बनाता था. महिलाओं को भरोसा दिलाया जाता था कि उनके पास गर्भधारण की खास व्यवस्था और तकनीक है. इसके बदले उनसे भी अलग-अलग चरणों में मोटी रकम वसूली जाती थी. सामाजिक बदनामी के डर से कई पीड़ित सामने नहीं आए, जिससे ठगी का नेटवर्क और फैलता गया. 

    इस साइबर ठगी का भंडाफोड़ बिहार के हिसुआ थाना क्षेत्र के मनवां गांव में हुआ, जहां एक ठगी अड्डे की सूचना पुलिस को मिली. नवादा पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर थाना और स्थानीय थाना की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. पूछताछ में उन्होंने फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लाखों रुपये ठगने की बात कबूली. पुलिस ने मोबाइल फोन, सिम कार्ड और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं. इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.


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