ममता बनर्जी की पार्टी में अंदरूनी बगावत? 20 सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलों से तेज हुई सियासी हलचल

    ममता बनर्जी की पार्टी में अंदरूनी बगावत? 20 सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलों से तेज हुई सियासी हलचल

    टीएनपी डेस्क: पश्चिम बंगाल में सचमुच क्या कुछ बहुत बड़ा होने वाला है? क्या तृणमूल कांग्रेस में "सुनामी" आने वाली है? क्या सच में तृणमूल कांग्रेस के बीस  सांसद और कुछ  विधायक  एक साथ टूट जाएंगे? यह बात भी सच है कि अगर 20 सांसद एक साथ टूटते हैं तो दल बदल कानून प्रभावी नहीं होगा।  मतलब कहा  जा सकता है कि ममता बनर्जी के लिए सामने बहुत बड़ी अग्नि परीक्षा है.  बीजेपी के सांसद सौमित्र खान ने बुधवार को दावा किया और कहा कि टीएमसी के लगभग 50 विधायक और 20  सांसद पार्टी से नाराज है.  यह कभी भी किसी भी वक्त बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.  

    भाजपा केंद्रीय नेतृत्व का सिग्नल मिलते ही होगा खेल

    उनका दावा है कि अगर केंद्रीय नेतृत्व हरी झंडी दे दी, तो बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।  यह  अलग बात है कि फिलहाल तृणमूल कांग्रेस में बेचैनी है.  ममता बनर्जी पार्टी को एकजुट  रखने की लगातार कोशिश कर रही है ।  मनोबल बढ़ा रही हैं , लेकिन आगे क्या होगा, यह  कहना मुश्किल है.  बंगाल के बारासात में मंगलवार को मुख्यमंत्री सुभेंदु  अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में सांसद काकोली घोष का मौजूद रहना और उसके बाद उन्हें केंद्र से वाई  श्रेणी की सुरक्षा मिलाना  कुछ बड़े संकेत  कर रहे हैं.  सूत्र बता रहे हैं कि पिछले कुछ दिनों में नगर पालिका के 100 से अधिक पार्षद इस्तीफा दे चुके है.  भ्रष्टाचार और उगाही के मामले में तृणमूल कांग्रेस के  कई नेताओं की गिरफ्तारी हो चुकी है.  

    तृणमूल कांग्रेस  के सांसद ने  बताया बकवास  

    हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने भाजपा के इस दावे को खारिज किया है और कहा है कि भाजपा बौखलाई हुई है और अफवाह फैलाकर अशांति पैदा करना चाहती है.  हमारे सभी सांसद और विधायक एकजुट  हैं.  राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यदि सौमित्र खान का दावा  कुछ हद तक भी सही हुआ ,तो तृणमूल कांग्रेस में "सुनामी" आ जाएगी।  यह बात भी सच है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे से  केवल बंगाल की सत्ता ही नहीं बदली है, बल्कि बंगाल की राजनीति को भी हिला कर रख दिया है.  जिस  राजनीति की बदौलत ममता बनर्जी ने लाल झंडे की सरकार को उखाड़ फेंका था और खुद 15 साल तक शासन की बागडोर  संभाली, वह अब ढहता  दिख रहा ही.  तृणमूल कांग्रेस के लिए यह बहुत बड़ी परीक्षा की घड़ी बताई जा रही है.



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