रांची, 6 जनवरी. झारखंड के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र के लिए दूरगामी प्रभाव वाले एक ऐतिहासिक फैसले में, झारखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को झारखंड बिजली शुल्क (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 2021 और संबंधित बिजली शुल्क नियम, 2021 को असंवैधानिक और मनमाना बताते हुए रद्द कर दिया.
मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह फैसला एम/एस पाली हिल ब्रूवरीज प्राइवेट लिमिटेड बनाम झारखंड राज्य (डब्ल्यू.पी.(टी) संख्या 3228/2021) की अगुआई वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनाया. इनके साथ प्रमुख औद्योगिक इकाइयों, कैप्टिव पावर उत्पादकों, इस्पात निर्माताओं, खनन कंपनियों और उद्योग संघों द्वारा दायर 30 से अधिक संबद्ध याचिकाएं भी थीं.
अदालत का रुख किसने किया?
याचिकाएं झारखंड के औद्योगिक परिवेश के विभिन्न वर्गों ने दायर की थीं. इनमें रामकृष्ण फोर्जिंग्स, उषा मार्टिन, आरएसबी ट्रांसमिशन्स, बीएमडब्ल्यू इंडस्ट्रीज, रूंगटा माइंस, ईएसएल स्टील, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ला ओपाला आरजी और झारखंड के डीवीसी एचटी उपभोक्ताओं का संघ जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल थीं. उद्योगों का तर्क था कि यह संशोधित अधिनियम मनमाना और भेदभावपूर्ण है, जिससे राज्य में व्यापार करने की लागत बढ़ जाती है. अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए इन नियमों को रद्द कर दिया, जिससे राज्य के औद्योगिक विकास के लिए एक बड़ी राहत मिली है.