टीएनपी डेस्क (TNP DESK): 23 अप्रैल को बंगाल में पहले चरण का मतदान है. ऐसे में बंगाल का चुनाव प्रचार पूरी तरह से उफान पर है. सवाल किये जा रहे हैं कि 2021 की तरह बंगाल में "खेला होवे" या फिर 2026 में भाजपा को जीत का मिठास मिलेगा. दूसरी ओर भाजपा भी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में है, तो तृणमूल कांग्रेस भी अपनी इस "कठिन लड़ाई" में सब कुछ झोंक दिया है. चुनाव प्रचार तेज है, आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी कम नहीं है. नेताओं की जुबान भी बिगड़ रही है. ऐसे में दोनों दल कोई ऐसा पॉकेट छोड़ना नहीं चाहते, जहां उनके हाथ से वोट खिसकने का खतरा रहे .
बंगाल में तृणमूल-भाजपा सभी काम अंकगणित के हिसाब से किये हैं
दरअसल, बंगाल में उम्मीदवार चयन से लेकर प्रचार तक सब कुछ अंकगणित के हिसाब से हुआ है और हो रहा है. बंगाल के लगभग सवा करोड़ से भी अधिक हिंदी भाषी इस बार भी फैक्टर बन सकते हैं. जानकारी के अनुसार 50 से अधिक सीटों पर उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है और यही वजह है कि उम्मीदवारों के चयन में भाजपा भी हिंदी भाषी लोगों को मैदान में उतारा है, तो तृणमूल कांग्रेस भी इसमें तनिक पीछे नहीं है. बात इतनी ही नहीं है, चुनाव प्रचार में भी हिंदी भाषी उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया गया है. तृणमूल कांग्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद जैसे चेहरों को चुनाव मैदान में आगे कर दिया है. एक अनुमान के अनुसार बंगाल की आबादी लगभग 10:50 करोड़ है, जिसमें हिंदी भाषियों की संख्या सवा करोड़ के आसपास है. यह मुख्य रूप से शहरी और औद्योगिक क्षेत्र में रहते है.
ममता बनर्जी इस फैक्टर को अच्छी तरह समझ कर काम की है
ममता बनर्जी चुनाव के पहले से ही हिंदी भाषी के प्रभाव को समझ रही है और यही वजह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदी अकादमी की स्थापना की और छठ जैसे त्योहार पर दो दिन की सरकारी छुट्टी का ऐलान कर हिंदी भाषी लोगों को अपनी ओर खींचने की कोशिश की है. तो बीजेपी स्थानीय व्यापारियों और हिंदी समाज के प्रभावशाली लोगों के साथ संपर्क बढ़ाकर उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश पहले भी की है और इस बार भी कर रही है. बंगाल का चुनाव बहुत ही खास होने वाला है. 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीट जीतकर सबको चौंका दिया था. यह अलग बात है कि इस एकतरफा से जीत में ममता बनर्जी नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी के हाथों पराजित हो गई थी. 2021 में बीजेपी को मात्र 77 सीट मिली थी. बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री कमान संभाले हुए हैं, तो ममता बनर्जी खुद तो चुनाव प्रचार में लगी हुई है ही, अपने सभी "कमांडरों" को लगा दिया है. ममता बनर्जी चौथी बार सरकार बनाने के लिए चुनाव में हैं, तो भाजपा पहली बार बंगाल में फतह हासिल करने के लिए जी जान से जुटी हुई है. अब देखना दिलचस्प होगा कि 4 मई को परिणाम किसके पक्ष में जाता है.


