फूलों का सेज या कांटों का ताज! विधायक बसंत सोरेन का दूसरा कार्यकाल

    फूलों का सेज या कांटों का ताज! विधायक बसंत सोरेन का दूसरा कार्यकाल

    दुमका (DUMKA) : झारखंड विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया है. झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नेतृत्व में दोबारा इंडी गठबंधन की सरकार बन गई है. 11 मंत्री के साथ मंत्रिमंडल गठन हो चुका है. सभी मंत्रियों को उनके विभागों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है. 4 दिवसीय विधान सभा का सत्र सोमवार से शुरू हो गया, जिसमें विधायकों का शपथ ग्रहण हुआ.

    कई ऐसे मुद्दे हम जो हर चुनाव में बनता है मुद्दा

    दुमका के परिदृश्य में देखें तो इसे झारखंड की उपराजधानी का दर्जा प्राप्त है. जिले के चार विधानसभा में से 3 सीट पर झामुमो को सफलता मिली. दुमका सांसद भी झामुमो से है. इस स्थिति में कई ऐसी समस्याएं है जो अलग झारखंड राज्य बनने के 24 वर्ष बाद भी उसका समाधान नहीं हो पाया है. दुमका में हाइकोर्ट बैंच की स्थापना हो या फिर सघन अधिवास से कचरा के पहाड़ का निष्पादन, ट्रैफिक थाना हो या साइबर थाना की स्थापना, मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना हो या युवाओं को रोजगार मुहैया कराना.

    विधायक के साथ-साथ बसंत हैं सीएम हेमंत के छोटे भाई, जनता की है दुगुनी अपेक्षा

    बसंत सोरेन दूसरी बार दुमका सीट से विधायक निर्वाचित हुए है. यह कार्यकाल उनके लिए फूलों का सेज नहीं बल्कि कांटों का ताज है. सीएम हेमंत सोरेन के छोटे भाई होने के नाते क्षेत्र के मतदाताओं की अपेक्षा उनसे ज्यादा है. दुमका को उपराजधानी के तर्ज पर संवारना उनकी प्राथमिकता में शामिल है. इस दिशा में कई कार्य हुए भी है, लेकिन जो है उसमें यहां सीएम कैंप कार्यालय को मिनी सचिवालय के रूप में क्रियाशील करना है. इस बार चुनाव जीतने के बाद पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि युवाओं को नौकरी मिले यह उनका प्रयास रहेगा.

    स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर यहां मेडिकल कॉलेज है, लेकिन संसाधन की कमी के कारण लोगों को आज भी बाहर जाना पड़ता है. शहर के बक्शी बांध रोड में दशकों से शहर का कचरा फेंका जाता है, जिससे यहां कचरा का पहाड़ खड़ा हो गया है. इसे सघन अधिवास से दूर स्थानांतरित करने की अपेक्षा शहरवासी बसंत सोरेन से रखते है. इसके अलावे हाई कोर्ट बेंच की स्थापना भी एक ऐसा मुद्दा है जो अलग राज्य बनने के साथ ही अधर में लटका है. इन मुद्दों का कैसे और कब तक समाधान होगा यह तो अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना जरूर है कि लोगों की अपेक्षा विधायक बसंत सोरेन से है.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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