बिहार में राजनीतिक खुसुर-फुसुर के बीच राजनीतिक पंडित भी हैरान कि क्या नीतीश कुमार बिहार छोड़ देंगे?

    बिहार में राजनीतिक खुसुर-फुसुर के बीच राजनीतिक पंडित भी हैरान कि क्या नीतीश कुमार बिहार छोड़ देंगे?

    धनबाद: झारखंड के चर्चित विधायक सरयू राय ने कहा है कि बिहार के सत्ता गलियारे में चल रही खुसुर फुसुर की राजनीतिक खबरों पर तत्काल विराम लगना चाहिए .सही निर्णय सही समय पर परस्पर विश्वास आधारित सही तरीका से उचित सोच विचार के उपरांत किया जाना श्रेयस्कर होता है. 

    पर्दे के पीछे की गतिविधियों के तात्कालिक प्रभाव में हुए निर्णय फलदाई नहीं होते. बता दें कि बुधवार से ही बिहार की राजनीति में एक अजीब किस्म की सर गर्मी दिख रही है. पहले तो ऐसा लगा कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने की बात " बुरा न मानो होली" हो सकती है. लेकिन धीरे-धीरे इसकी सत्यता सामने आने लगी. 

    यह अलग बात है कि किसी को भरोसा नहीं हो रहा है कि नीतीश कुमार इतनी आसानी से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं. यह बात भी उतना ही सच है कि नीतीश कुमार चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में वह राज्यसभा जा सकते हैं, इस पर अभी भी राजनीतिक पंडितों का संशय बना हुआ है. 

    यह अलग बात है कि बुधवार की रात से गुरुवार के दिन तक बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम बदल रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज पटना पहुंच रहे हैं. एनडीए के सभी विधायकों को पटना पहुंचने को कहा गया है. दावा तो यह भी किया जा रहा है कि आज यानी गुरुवार को फर्स्ट हाफ में नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नॉमिनेशन दाखिल करेंगे. लेकिन अंतिम समय में फैसला बदल जाए तो कोई आश्चर्य नहीं .

    पहले चर्चा चली कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार राज्यसभा में जाएंगे और पांच मार्च को वह जदयू की सदस्यता ग्रहण करेंगे. इधर, जदयू नेताओं का कहना है कि अगर नीतीश कुमार बिहार की राजनीति से निकलकर दिल्ली पहुंचते हैं, तो बिहार में जदयू का क्या होगा? जदयू को नीतीश कुमार की पार्टी कहा जाता है. कोई भी फैसला नीतीश कुमार की सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता है. 

    बिहार में जदयू के पास पचासी विधायक हैं तो भाजपा के पास 89 विधायक हैं. इसके अलावा NDA के अन्य घटक दलों के भी विधायक हैं. कुल मिलाकर एनडीए के पास 202 विधायक हैं. बुधवार से लेकर गुरुवार तक बदले घटनाक्रम में आज क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी. नीतीश कुमार को मना लिया जाता है या नीतीश कुमार बिहार के सीएम बने रहने पर अड़े रहते हैं, इसका फैसला अब निकट है.

    वैसे राज्यसभा के नामांकन के लिए अंतिम तिथि 6 मार्च है. यानी अभी राजनीति बरकरार रहने की पूरी उम्मीद है.



    Related News