10 साल का इंतजार, 210 मीट्रिक टन वजन और 1008 शिवलिंग समाहित..जानिए पूर्वी चंपारण पहुंचा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग में क्या है खास

    10 साल का इंतजार, 210 मीट्रिक टन वजन और 1008 शिवलिंग समाहित..जानिए पूर्वी चंपारण पहुंचा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग में क्या है खास

    गोपालगंज (GOPALGANJ) : दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग अब गोपालगंज के डुमरिया घाट सेतु को पार करते हुए पूर्वी चंपारण पहुंच चुका है. मोतिहारी में बन रहे विराट रामायण मंदिर में इस विशाल शिवलिंग का आगमन हो गया है. करीब 210 टन वजनी इस शिवलिंग को डीएम, एसपी और विशेषज्ञों की टीम ने पूरी सावधानी के साथ नारायणी नदी के पार कराया. जैसे ही शिवलिंग ने बिहार की सीमा में प्रवेश किया, बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने उसका भव्य स्वागत किया. पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बड़ा बयान दिया. मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि महावीर मंदिर न्यास के पूर्व सचिव किशोर कुणाल का सपना था कि दुनिया का सबसे भव्य विराट रामायण मंदिर पूर्वी चंपारण में बने. इसी सपने को साकार करने के लिए पिछले 10 वर्षों से इस विशाल शिवलिंग का निर्माण किया जा रहा था.

    उन्होंने बताया कि इस शिवलिंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 1008 शिवलिंग समाहित हैं. यानी कोई भी श्रद्धालु जब यहां जलाभिषेक करेगा, तो उसे 1008 शिवलिंगों पर जल चढ़ाने के बराबर पुण्य प्राप्त होगा. मंत्री ने कहा कि अयोध्या के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे विराट मंदिर होगा और वर्ष 2030 तक विराट रामायण मंदिर बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा.

    वहीं, महावीर मंदिर पटना के सचिव और बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य सायन कुणाल ने जानकारी दी कि 17 जनवरी को दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर में की जाएगी. यह दिन माघ कृष्ण चतुर्दशी का होगा, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है. इसी अवसर पर शिवलिंग के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी. पूर्वी चंपारण अब एक ऐतिहासिक धार्मिक केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जहां आस्था और भव्यता का अनोखा संगम देखने को मिलेगा.

    210 टन के शिवलिंग को देखने के लिए भक्तों की उमड़ी भारी भीड़

    बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि यह शिवलिंग सिर्फ़ एक पत्थर की संरचना नहीं है, बल्कि महान संकल्प और आस्था का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह स्वर्गीय किशोर कुणाल जी का सपना था कि एक ऐसा शिवलिंग बनाया जाए जिसके दर्शन और अभिषेक से 1008 शिवलिंगों की पूजा का पुण्य मिले. आज वह सपना सच हो रहा है. इस शिवलिंग का निर्माण महावीर मंदिर ट्रस्ट ने किया है, और ट्रस्ट की टीम पूरे प्रोजेक्ट की लगातार निगरानी कर रही है.

    बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सचिव सायन कुणाल ने कहा कि शिवलिंग 10 से 12 जनवरी के बीच केसरिया पहुंचेगा, और इसकी औपचारिक स्थापना 17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी के शुभ अवसर पर होगी. उन्होंने कहा कि विराट रामायण मंदिर का निर्माण 2030 तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद यह भव्य मंदिर भक्तों के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाएगा.


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