3rd March Special:जब डूबने की कगार पर पहुंच गई थी टाटा स्टील तो इस महिला ने गहने बेचकर बचाई थी साख

    3rd March Special:जब डूबने की कगार पर पहुंच गई थी टाटा स्टील तो इस महिला ने गहने बेचकर बचाई थी साख

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):टाटा स्टील विश्व का ऐसा उद्योग घराना है,जिस पर हर किसी को विश्वास है. पिछले 118 सालों से यह अपने बुलंदियों को छू रहा है. इसके पीछे कई लोगों की मेहनत और संघर्ष की कहानी जुड़ी हुई है. ऐसा नहीं है कि टाटा स्टील ने कभी बुरे समय को नहीं देखा. एक समय ऐसा आया था जब कंपनी डूबने की कगार पर थी, लेकिन एक महिला ने बुरे समय में टाटा स्टील की मदद की और इसे डूबने से बचा लिया.

    एक महिला की सूझबूझ ने बचाई थी कंपनी के साख

    कहा जाता है कि मर्द की कामयाबी के पीछे एक औरत का हाथ होता है. यह 100% सही बात है ऐसा टाटा स्टील की सफलता के पीछे भी एक महिला का ही योगदान है. टाटा स्टील भले ही आज 26 से भी ज्यादा देशो में पूरी सफलता के साथ कारोबार कर रहा है. जिसमें 80 हजार से अधिक कर्मचारी दिन रात मेहनत करते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि आज जिस टाटा स्टील को आप सफलता की बुलंदियों पर देख रहे हैं वह उसे बचानेवाली एक महिला है. यदि उसने बुरे समय में टाटा स्टील की मदद नहीं की तो आज शायद हमारे गर्व का प्रतीक माने जाने वाला टाटा स्टील बुलंदी पर नहीं होता है.तो चलिए जान लेते हैं आखिर वह महिला कौन है जिसने बुरे समय में टाटा स्टील को डूबने से बचाया था. आज हम महिला की पूरी संघर्ष की कहानी बताएंगे और यह भी टाटा की बताएंगे टाटा स्टील से महिलाओं का क्या संबंध था आखिर क्यों उसने अपना बेसकिमती सामान को गिरवी रखकर टाटा स्टील की मदद की.

    आज भी टाटा स्टील के इतिहास में याद किया जाता है

    किसी भी उद्योग धंधे में दो चीजें सामान्य होती है.वह है मुनाफा या नुकसान. कभी बिजनेस में मुनाफा होता है, तो कभी नुकसान भी होता है. टाटा स्टील के साथ कुछ ऐसा ही हुआ था. जब कंपनी लॉस में चल रही थी और वह डूबने के कगार पर थी लेकिन लेडी मेहरबाई टाटा ने मुसीबत के समय में अपने कीमती सामान को गिरवी रखकर इसे धीरे-धीरे मंदी से उबार दिया. आज भले ही टाटा स्टील ट्रिलियन रुपये में बिजनेस करती है लेकिन एक समय था जब टाटा स्टील के पास कर्मचारियों को वेतन देने का पैसा तक नहीं था. तब लेडी मेहरबाई टाटा ने बेसकिमती हीरा को गिरवी रख दिया था. कोहिनूर की कीमत 10 से 12 हजार करोड़ के बीच थी.

    पढ़ें कौन है वो महिला

    लेडी मेहरबाई टाटा ने बिना सोचे समझे इस कंपनी को बचाया था, इन्हीं की बदौलत आज टाटा ग्रुप सफलता की बुलंदियों को छू रही है. आपको बतायें कि महिला मेहराबाई टाटा सर दारोबजी टाटा की पत्नी थी. जब उन्हें पता चला की कंपनी डूबने की कगार पर है तो उन्होने बिना सोचे समझे कंपनी की मदद की. आपको बताएं कि इस कहानी का पता तब चला जब टाटा स्टोरी बुक में लेखक हरीश भट्ट ने इस बात का खुलासा किया.


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