TNP DESK: एलपीजी उपभोक्ताओं, खासकर होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए राहत भरी खबर है. 1 अगस्त 2026 से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती की गई है. नई दरें लागू होने के बाद कई प्रमुख शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर पहले के मुकाबले काफी सस्ता हो गया है. हालांकि, 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है.
कई शहरों में घटी कमर्शियल सिलेंडर की कीमत
सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल की ओर से जारी नई कीमतों के अनुसार, दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 192 रुपये घटाकर 2,738 रुपये कर दी गई है. वहीं, कोलकाता में इस सिलेंडर के दाम में 209 रुपये की कमी आई है, जिसके बाद इसकी नई कीमत 2,872.50 रुपये हो गई है.
इसी तरह बिहार की राजधानी पटना में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर अब 3,018 रुपये में मिलेगा, जबकि पहले इसकी कीमत 3,227 रुपये थी. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी सिलेंडर 192 रुपये सस्ता हुआ है और इसकी नई कीमत 2,860.50 रुपये तय की गई है.
व्यापारियों को मिलेगी राहत
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में आई इस कमी का सीधा फायदा होटल, ढाबा, रेस्तरां, कैटरिंग सर्विस और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को मिलेगा, जहां बड़े पैमाने पर एलपीजी का उपयोग किया जाता है. गैस सस्ती होने से इन कारोबारों की परिचालन लागत में कुछ कमी आने की उम्मीद है.
लगातार दूसरे महीने मिली राहत
यह लगातार दूसरा महीना है जब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई है. इससे पहले 1 जुलाई 2026 को भी 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम घटाए गए थे. उस समय दिल्ली में इसकी कीमत 183.50 रुपये कम होकर 2,930 रुपये हो गई थी, जबकि इससे पहले यह 3,113.50 रुपये में मिल रहा था. अगस्त में हुई नई कटौती के बाद कारोबारियों को एक बार फिर राहत मिली है.
घरेलू सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं
इस बार 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आम घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही पुराने रेट पर एलपीजी सिलेंडर मिलेगा.
कैसे तय होती हैं LPG सिलेंडर की कीमतें?
भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें सरकारी तेल विपणन कंपनियां तय करती हैं. इनमें इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) प्रमुख हैं. कीमत तय करने के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और अन्य परिचालन खर्च जैसे कई कारकों का आकलन किया जाता है. आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को इन कीमतों की समीक्षा की जाती है और जरूरत के अनुसार नई दरें लागू की जाती हैं.
