देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आ रही है। अगर मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है। दरअसल, तेल कंपनियों को मौजूदा बिक्री कीमत और वास्तविक लागत के बीच अंतर की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा है। दावा है कि डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर, जबकि पेट्रोल पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है।
इसका सीधा मतलब है कि तेल कंपनियां जिस कीमत पर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं, उस कीमत पर उनकी लागत पूरी नहीं हो पा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत और दूसरे खर्च पेट्रोल-डीजल की कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
अगर कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है या रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो तेल कंपनियों की लागत और बढ़ सकती है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संशोधन की संभावना बढ़ जाएगी। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें निश्चित तौर पर बढ़ने वाली हैं। अंतिम फैसला सरकार और तेल कंपनियों की ओर से लिया जाएगा।
अगर पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो इसका असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से सब्जी, फल, किराना और दूसरी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। यानी ईंधन की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम आदमी के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
फिलहाल लोगों की नजर तेल कंपनियों और सरकार के अगले फैसले पर है। सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी, या फिर आम लोगों को राहत मिलती रहेगी।
