धनबाद: झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर के बाद प्रिंस खान गिरोह भी अब कमजोर पड़ जाएगा. फिलहाल सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान मिलकर संगठित गिरोह चला रहे थे.जानकार बताते हैं कि गैंगस्टर प्रिंस खान फिलहाल सुजीत सिन्हा का नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा था और इसी नेटवर्क के जरिए लोगों को रंगदारी के लिए धमका रहा है.
हाल के दिनों में पलामू से लेकर रांची तक प्रिंस खान की जो गतिविधियां बढ़ी है, उसकी वजह सुजीत सिन्हा गिरोह से हाथ मिलाना बताया जाता है. लेकिन रविवार की रात जामताड़ा में सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद निश्चित रूप से प्रिंस खान गिरोह और कमजोर होगा.
दरअसल रविवार की रात मुठभेड़ में सुजीत सिन्हा मारा गया है. सुजीत सिन्हा को साहिबगंज जेल से धनबाद जेल शिफ्ट करने के लिए लाया जा रहा था. बताया गया है कि इसी दौरान पुलिस की गाड़ी पंक्चर हो गई. सुजीत सिन्हा को दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किया जा रहा था. इसी दौरान वह एक जवान का हथियार छीनकर भागने लगा और पुलिस पर फायरिंग की. जवाबी कार्रवाई में सुजीत सिन्हा मारा गया.
सुजीत सिन्हा आतंक का दूसरा नाम बन गया था .वह समय और परिस्थिति के अनुसार गैंगस्टरों से सांठगांठ करने में माहिर था. सूत्र बताते हैं कि धनबाद जेल में मारे गए उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर अमन सिंह और प्रिंस खान के साथ मिलकर गैंगस्टर सुजीत सिन्हा ने धनबाद में भी दहशत फैलाया था. 2020 में अपने सहयोगियों के जरिए धनबाद के कई कारोबारियों को धमकी दी थी.
सुजीत सिन्हा से प्रभावित होकर ही धनबाद के तेतुलमारी का सूरज सिंह 2016 में आतंक का पर्याय बन गया था. कम समय में उसने धनबाद में रंगदारी के लिए फायरिंग और बमबाजी की घटना को अंजाम दिया था. धनबाद में रंगदारी का नेटवर्क खड़ा करने से पहले सूरज सिंह भी सुजीत सिन्हा गिरोह से ही जुड़ा हुआ था. सुजीत सिन्हा से प्रभावित होकर ही सूरज सिंह ने रंगदारी का काम शुरू किया था. बाद में वाराणसी के एक अस्पताल में सूरज सिंह की मौत हो गई थी.
जानकार तो यह भी बताते हैं कि मारा गया सुजीत सिन्हा गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव (अब मृत) का खास शूटर माना जाता था. श्रीवास्तव गैंग से अलग होकर सुजीत सिन्हा ने अलग गैंग बनाया. सुजीत सिन्हा नए युवकों को इस्तेमाल करता था. फिलहाल जेल में रहते हुए वह प्रिंस खान गैंग को सहयोग कर रहा था. यही वजह है कि रांची, धनबाद, जमशेदपुर समेत कई शहरों मे कारोबारियों को प्रिंस खान द्वारा धमकी दी जा रही थी.
यह अलग बात है कि धनबाद पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से प्रिंस खान गैंग के बहुत लड़के जेल भेजे जा चुके हैं. धनबाद में कई का एनकाउंटर भी हुए है.
गैंगस्टर सुजीत सिन्हा ने अपराध की दुनिया में एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया था, जो जेल के सलाखों के पीछे रहने के बावजूद सक्रिय रहता था. उल्लेखनीय है कि पलामू के रेड़मा मोहल्ले का रहने वाला सुजीत सिन्हा झारखंड के चर्चित गैंगस्टरों में शामिल रहा है. उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी ,आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़े 50 से अधिक मामले झारखंड के विभिन्न थानों में दर्ज बताए जाते हैं. सुजीत सिन्हा का नेटवर्क पलामू ,गढ़वा, लातेहार ,रांची, धनबाद ,च त रा सहित अन्य जिलों में काम करता था.
उस पर कोयला कारोबार, सड़क निर्माण ठेकेदार, क्रेशर ,ट्रांसपोर्ट और अन्य करोबारियों से लेवी वसूलने के आरोप हैं.
दावा किया जा रहा था कि जेल में बंद रहने के दौरान भी वह अपने गिरोह का संचालन कर रहा था. पुलिस के लिए वह एक बड़ी चुनौती बन गया था.
