गुमला जिले के सिसई प्रखंड क्षेत्र की ओलमुंडा पंचायत अंतर्गत अमकुली करम टंगरा गांव के ग्रामीण पिछले करीब चार महीने से बिजली संकट झेल रहे हैं. गांव में लगा ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद से बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है. लंबे समय से बिजली नहीं रहने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन ढिबरी के सहारे जीवन गुजारना पड़ रहा है.
बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है. शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता है और बच्चों को ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ती है. ग्रामीणों के मुताबिक, ढिबरी जलाने के लिए मिट्टी का तेल भी आसानी से उपलब्ध नहीं है. करीब 160 रुपये प्रति लीटर कीमत होने के बावजूद इसे हासिल करना मुश्किल हो रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि ट्रांसफार्मर खराब होने की सूचना कई बार संबंधित विभाग को दी गई, लेकिन अब तक न तो ट्रांसफार्मर की मरम्मत हुई और न ही नया ट्रांसफार्मर लगाया गया. मोबाइल चार्ज करने से लेकर घरेलू कामकाज तक के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है.
बरसात और रात के समय समस्या और गंभीर हो जाती है. ग्रामीणों के अनुसार, कई बार जहरीले सांप घरों में घुस जाते हैं, लेकिन अंधेरे के कारण उन्हें देखना मुश्किल होता है. महिलाओं को भी घरेलू काम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
ग्रामीणों ने बताया कि लगातार वज्रपात के कारण ट्रांसफार्मर खराब होता है. ऐसे में उनकी मांग है कि ट्रांसफार्मर को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए, ताकि बार-बार खराब होने की समस्या दूर हो सके.
अब सवाल यह है कि जब सरकार 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की बात करती है, तो चार महीने से बिजलीविहीन इस गांव के लोग इस योजना का लाभ कैसे उठाएंगे? ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिलने से पलायन के अलावा उनके पास विकल्प भी सीमित होते जा रहे हैं. ऐसे में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं.
