झारखंड सरकार खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने और उनकी प्रतिभा को निखारने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन गुमला की गोल्ड मेडलिस्ट हॉकी खिलाड़ी पार्वती तोपनो के परिवार की बदहाली इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है. देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पार्वती का परिवार आज भी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है. लगातार बारिश के कारण उनके घर की दीवार ढह गई है और पूरा परिवार जर्जर मकान में रहने को मजबूर है. विडंबना यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली खिलाड़ी के परिवार को आज भी सरकारी मदद का इंतजार है.
रिपोर्ट: गुमला जिले के कामडारा प्रखंड के कुम्हार टोली में रहने वाली हॉकी खिलाड़ी पार्वती तोपनो के घर की बदहाली की तस्वीर सामने आई है. लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश के कारण उनके घर की दीवार ढह गई. परिवार ने लकड़ी के सहारे दीवार को टिकाकर रखा है, लेकिन मकान के और क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है.
पार्वती के पिता सोमा तोपनो मजदूरी और राजमिस्त्री का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. तीन बच्चों में सबसे छोटी पार्वती ने एपिफानी बालिका विद्यालय में पढ़ाई के दौरान हॉकी खेलना शुरू किया. प्रतिभा के दम पर उसका चयन रांची के एकलव्य हॉस्टल में हुआ, जहां उसने प्रशिक्षण प्राप्त किया.
4 से 13 सितंबर 2026 तक चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में पार्वती भारतीय टीम का हिस्सा बनीं और स्वर्ण पदक जीतकर देश और झारखंड का नाम रोशन किया.
लेकिन अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के बावजूद परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं बदली. अब पिता ने प्रशासन से आवास की मरम्मत और आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है. वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चंदा जुटाकर घर की मरम्मत कराने की बात कही है.
सवाल यह है कि जब खिलाड़ी देश का गौरव बढ़ाते हैं, तो उनके परिवारों की बुनियादी जरूरतों और सम्मानजनक जीवन की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
गुमला | सुशील कुमार सिंह
