देवघर बाबा मंदिर दुर्गा पूजा पर बंद हो जाते है माता मंदिर का पट,जानिए क्यों अलग है परंपरा

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Digital News Desk • October 16, 2026

देवघर विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है.यहाँ पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ विराजमान है.यह ज्योर्तिलिंग उसी जगह स्थापित है आदि शक्ति माता सती का हृदय यहां गिरने से देश के 52 शक्तिपीठों में एक शक्तिपीठ के रुप में भी इस पवित्र स्थल की मान्यता है.

देवघर विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है.यहाँ पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ विराजमान है.यह ज्योर्तिलिंग उसी जगह स्थापित है आदि शक्ति माता सती का हृदय यहां गिरने से देश के 52 शक्तिपीठों में एक शक्तिपीठ के रुप में भी इस पवित्र स्थल की मान्यता है.जानकारों के अनुसार जिस जगह पर माता सती का हृदय गिरा था उसी जगह पर पवित्र ज्योतिर्लिंग भी स्थापित है.इसी वजह से नवरात्र के अवसर पर बाबा के जलाभिषेक से शिव और शक्ति दोनों की एक साथ पूजा-अर्चना का फल प्राप्त होता है.

सप्तमी से नवमी तक तीन मंदिरों का पट रहता है बंद,न पुरोहित और न ही श्रद्धालु कर सकते हैं स्पर्श

नवरात्रि में जहाँ सभी मंदिर,पूजा पंडालो में स्थापित माँ की प्रतिमा का अनावरण कर आम भक्तों के लिए खोल दिया जाता है.लेकिन बाबा बैद्यनाथ मंदिर की इससे हटकर परंपरा है.मंदिर परिसर प्रांगण में स्थित माता पार्वती के रूप में स्थापित त्रिपुर सुंदरी, कामाख्या के रूप में स्थापित माता संध्या और माँ काली के मंदिर का पट सप्तमी से नवमी तिथि तक बंद कर दिया जाता है.मंदिर का पट बंद होने के बाद न ही स्थानीय पुरोहित और न ही आम श्रद्धालु तीनों मंदिर में स्थापित माता के विग्रह को स्पर्श कर पूजा अर्चना कर सकते है.बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर के सरदार पंडा पंडित गुलाबानन्द ओझा ने बताया कि इस दौरान तीनों मंदिर के पुजारी जनकल्याण के लिए तांत्रिक विधि से पूजा अर्चना करते है.

पुरोहित दर्पण में देख कर माता की करते हैं दूर से पूजा अर्चना

सरदार पंडा पंडित गुलाबानन्द ओझा ने बताया कि बाबा मंदिर की परंपरा के अनुसार नवरात्रि में जब माँ काली,पार्वती और संध्या मंदिर का पट बंद हो जाता है तो उस मंदिर के पुरोहित दर्पण के माध्यम से माता के विग्रह को देखकर दूर से उनका दैनिक कालीन पूजा अर्चना करते हैं.नवमी के बाद तीनों मंदिर का पट सभी के लिए खोल दिया जाता है.

देश के सभी पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सिर्फ देवघर ही ऐसा तीर्थस्थल है जहाँ शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं.तभी तो यहाँ पूजा अर्चना करने से दुगुना फल की प्राप्ति होती है.

देवघर - प्रशांत कुमार.