गुमला जिला मुख्यालय से सटी सड़कों की बदहाल स्थिति ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. शहर से महज आधा किलोमीटर दूर चेटर सड़क की हालत ऐसी है कि बारिश के बाद सड़क पर बने गड्ढे पानी से भर जाते हैं. इस सड़क से रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना होता है. ऐसे में सड़क की जर्जर स्थिति लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है.
झारखंड सरकार गांव के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन गुमला जिला मुख्यालय से सटे इलाके की सड़कें इन दावों की जमीनी तस्वीर दिखा रही हैं. हम बात कर रहे हैं चेटर सड़क की, जो थाना चौक को जोड़ती है और दर्जनों गांवों के लोगों के लिए जिला मुख्यालय आने-जाने का प्रमुख रास्ता है.
सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं. हल्की बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी जमा हो जाता है. कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, यह समझना मुश्किल हो जाता है. इससे पैदल राहगीरों के साथ-साथ बाइक और दूसरे वाहनों से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी होती है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका काफी पुराना और घनी आबादी वाला है. इसके बावजूद सड़क की मरम्मत को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई. यह क्षेत्र नगर परिषद के अधीन आता है, लेकिन लंबे समय से सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई है.
सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर जब नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार से बात की गई तो उन्होंने भी सड़क की स्थिति खराब होने की बात स्वीकार की. उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय की डीएसपी रोड और चेटर सड़क को बेहतर बनाने की कार्रवाई की जा रही है.
उन्होंने कहा कि राशि उपलब्ध होने और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों सड़कों का निर्माण कराया जाएगा. साथ ही नई सड़क में जल निकासी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि बारिश के दौरान जलजमाव की समस्या दोबारा न हो.
गुमला जिला मुख्यालय से महज कुछ दूरी पर सड़क की यह तस्वीर विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है. अब देखना होगा कि नगर परिषद की ओर से किए गए वादे कब तक जमीन पर उतरते हैं और लोगों को इस बदहाल सड़क से कब राहत मिलती है.
