रांची(RANCHI): झारखंड लोकसेवा आयोग की 11-13 सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ़्टी अधिकारी परीक्षा रद्द मामले में हाई कोर्ट ने एक बड़ा आदेश दिया है. जिसमें राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दिया. साथ ही राज्य सरकार और JPSC जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. पूरे मामले में अब अगली सुनवाई 15 सितंबर हाई कोर्ट में की जाएगी. कोर्ट के इस आदेश के बाद अब JSSC CGL के सफल अभ्यर्थियों में भी उम्मीद जगी है.
कोर्ट ने दलील सुनने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर लगाई रोक
बीते 18 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैबिनेट की बैठक में एक साथ 21 परीक्षा को रद्द करने का आदेश दिया. कैबिनेट के इस आदेश के बाद JPSC11-13,JSSC CGL समेत कई परीक्षा पास कर अलग अलग विभाग में अपनी सेवा दे रहे हजारों अधिकारी और कर्मचारी बेरोजगार हो गए. इस आदेश के बाद सभी ने सरकार का विरोध शुरू किया. साथ ही सरकार के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी. जिसपर हाई कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई किया. न्यायमूर्ति दीपिक रौशन की अदालत में JPSC 11-13 और फूड सेफ़्टी अधिकारी परीक्षा रद्द मामले में सुनवाई किया.
सर्जर और आयोग करेगी जवाब दाखिल
कोर्ट में अभ्यर्थियों के पक्ष को अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा,अमृतांश वत्स और अधिवक्ता पीएएस पति ने रखा. कोर्ट में एक मजबूत दलील रखी. जिसके बाद कोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दिया. साथ ही पूरे मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार और JPSC को जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. जिसमें राज्य सरकार और आयोग अपना जवाब दाखिल करेगी. साथ ही कोर्ट में मजबूत कारण बताएगी की आखिर परीक्षा किस परिस्थिति में रद्द की गई है.कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदर्शन कर रहे अधिकारियों में खुशी की लहर दौड़ी है.
JSSC CGL अभ्यर्थियों में उम्मीद
कोर्ट के इस आदेश से JSSCCGL के सफल अभ्यर्थियों में भी एक उम्मीद जगी है. JSSC CGL के सफल अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती दी है. जिसमें बताया गया है कि राज्य सरकार ने बिना जांच के ही उनकी नियुक्ति रद्द कर दिया. जिससे वह सड़क पर आगए है. साथ ही इस नियुक्ति से जुड़े पूरे मामले में कोर्ट में अधिवक्ता ने याचिका के जरिए तथ्य रखा है. पूर्व में भी हाई कोर्ट में इस मामले में लंबी सुनवाई चली है और हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही सभी को राज्य सरकार ने नियुक्ति दिया था. JSSC CGL के 1900 से ज्यादा सफल अभ्यर्थी नियुक्ति मिलने के बाद अलग अलग विभाग में सेवा दे रहे थे.
