रांची (RANCHI): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की परतें खुलती जा रही हैं. अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की पूछताछ में आरोपियों के बयानों से परीक्षा प्रक्रिया में कथित सुनियोजित हेरफेर के गंभीर आरोप सामने आए हैं. जांच में सहायक वन संरक्षक (ACF), वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) और JPSC की प्रारंभिक व मुख्य परीक्षाओं से जुड़े कथित नेटवर्क की जानकारी मिली है. जांच एजेंसी के सामने दिए गए बयानों के मुताबिक, कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों से बड़ी रकम लेकर उनके परीक्षा परिणाम प्रभावित कराने की कोशिश की जाती थी. आरोप है कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को स्ट्रांग रूम से बाहर निकालकर दूसरे स्थानों पर ले जाया जाता और वहां उत्तर लिखवाने के बाद उन्हें दोबारा जमा किया जाता था.
हरिओम टावर से कथित तौर पर संचालित होता था नेटवर्क
जांच में सामने आए एक बयान के अनुसार, ACF और FRO की प्रारंभिक परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी के नाम पर रांची के हरिओम टावर में एक कमरा किराए पर लिया गया था. आरोप है कि इस जगह का इस्तेमाल कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया जाता था. अभियुक्त अभय तिवारी ने CID को दिए बयान में कथित तौर पर बताया कि एजेंट सतपाल और मिश्रा के माध्यम से पंजाब, हरियाणा और लखनऊ से कुछ लोगों को बुलाया जाता था. आरोप है कि इन लोगों से कथित रूप से चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं लिखवाई जाती थीं.
बयानों में यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों की कॉपियों में अंक बढ़वाने के लिए अलग-अलग कॉलेज और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से संपर्क किया जाता था. अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, कॉपियां लिखवाने और उम्मीदवारों के अंक बढ़वाने के लिए उसने करीब 40 लाख रुपये का भुगतान किया था. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसी बयानों में किए गए दावों की सत्यता तथा उनसे जुड़े दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है.
अभियुक्त हेमंत वर्मा के कथित बयान में मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर की एक कथित प्रक्रिया का जिक्र किया गया है. आरोप के मुताबिक, परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाएं JPSC के स्ट्रांग रूम में जमा होती थीं. इसके बाद कथित तौर पर सेटिंग वाले उम्मीदवारों की कॉपियां बाहर निकाली जाती थीं. जांच में सामने आए दावों के अनुसार, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, प्रदीप कुमार सिंह और मो. उस्मान इन कॉपियों को होटल या किराए के फ्लैटों तक पहुंचाते थे. वहां कथित तौर पर विशेषज्ञों या संबंधित अभ्यर्थियों से उत्तर लिखवाए जाते थे. इसके बाद कॉपियों को वापस स्ट्रांग रूम में पहुंचाने का आरोप है.
स्कैनिंग रूम में भी संदिग्ध आवाजाही की जांच
CID अब स्ट्रांग रूम के साथ-साथ स्कैनिंग रूम में लोगों की आवाजाही की भी पड़ताल कर रही है. जांच में कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनकी मौजूदगी को लेकर एजेंसी जानकारी जुटा रही है. इनमें रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, मो. उस्मान, प्रदीप कुमार सिंह और हेमंत वर्मा के अलावा उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते के नाम का भी जिक्र सामने आया है. CID अब कथित परीक्षा नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका, उम्मीदवारों से पैसे के लेन-देन और कॉपियों की आवाजाही से जुड़े साक्ष्यों को जोड़ने में जुटी है. जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के नाम और परीक्षा प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं से जुड़ी और जानकारी सामने आने की संभावना है.
