रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने गुजरात में रजिस्टर्ड कुछ राजनीतिक दलों को मिले कथित भारी-भरकम चंदे को लेकर सवाल उठाए हैं. पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने रांची स्थित पार्टी के कैंप कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि गुजरात में कई ऐसे राजनीतिक दल हैं, जिनकी राजनीतिक गतिविधियां बेहद कम हैं, लेकिन उनके खातों में करोड़ों रुपये का चंदा आया है.
विनोद पांडे ने कहा कि सोशल मीडिया पर गुजरात और चुनाव आयोग से जुड़ी एक खबर चर्चा में है. उन्होंने दावा किया कि गुजरात में रजिस्टर्ड कुछ राजनीतिक दलों के कार्यालय तो मौजूद हैं, लेकिन जमीन पर उनकी राजनीतिक गतिविधियां दिखाई नहीं देतीं. इसके बावजूद इन दलों को बड़ी रकम चंदे के रूप में मिलने की जानकारी सामने आई है.
'दफ्तर कहीं दुकान में तो कहीं एक कमरे में'
झामुमो महासचिव ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के कार्यालय दुकान या फ्लैट के एक कमरे में बताए गए हैं और कई कार्यालय नियमित रूप से खुलते तक नहीं हैं. इसके बावजूद इन पार्टियों के खातों में बड़ी रकम आने का दावा किया जा रहा है.
विनोद पांडे ने कहा कि अब तक शेल कंपनियों की चर्चा होती थी, लेकिन अगर राजनीतिक गतिविधि नहीं करने वाले दलों के जरिए बड़ी रकम का लेनदेन हो रहा है तो इसकी जांच जरूरी है. उन्होंने सवाल किया कि आखिर इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसका इस्तेमाल कहां किया गया.
झामुमो ने लोकशाही सत्ता पार्टी का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इस पार्टी को करीब 1,045 करोड़ रुपये का चंदा मिला. पार्टी ने यह भी दावा किया कि इसमें से करीब 900 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का ब्यौरा दिया गया है. विनोद पांडे ने सवाल उठाया कि अगर पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां बेहद सीमित हैं तो इतनी बड़ी रकम कहां और किस काम पर खर्च की गई.
उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसी 10 राजनीतिक पार्टियों को बड़ी मात्रा में चंदा मिलने की जानकारी सामने आई है. झामुमो ने इन दलों के कार्यालय, राजनीतिक गतिविधियों और बैंक खातों की जांच की मांग की है.
विनोद पांडे ने चुनाव आयोग, आयकर विभाग और सीबीआई जैसी एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक दलों के खातों में इतनी बड़ी रकम का लेनदेन हुआ है तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जांच करनी चाहिए.
फिलहाल ये आरोप झामुमो की ओर से लगाए गए हैं. संबंधित राजनीतिक दलों, चुनाव आयोग या अन्य केंद्रीय एजेंसियों की प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी.
रिपोर्ट- समीर हुसैन
