झारखंड में SIR में नाम कटने पर 5 अगस्त के बाद कर सकते है दावा,चुनाव आयोग ने दी जानकारी

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Digital News Desk • July 31, 2026

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. 5 अगस्त से शुरू होने वाली दावा-आपत्ति प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों, ईआरओ, एईआरओ और अन्य अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रशिक्षण दिया. 

 

रांची (RANCHI) : झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. 5 अगस्त से शुरू होने वाली दावा-आपत्ति प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों, ईआरओ, एईआरओ और अन्य अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रशिक्षण दिया. उन्होंने कहा कि 5 अगस्त से 4 सितंबर तक चलने वाली इस प्रक्रिया में सभी आवेदनों का निष्पक्ष और समय पर सत्यापन किया जाए. अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मतदाता की पहचान, जन्मतिथि, सामान्य निवास स्थान और घोषणा-पत्र की जांच उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाए. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई भी विदेशी नागरिक सूची में शामिल न हो.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि यदि किसी मतदाता के रिकॉर्ड में कोई जानकारी अधूरी या गलत मिलती है, तो संबंधित व्यक्ति को नोटिस भेजकर जरूरी दस्तावेज मांगे जाएंगे. 5 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद जिन पात्र लोगों का नाम सूची में नहीं होगा, वे फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र भरकर अपना नाम जुड़वा सकेंगे. वहीं, जो लोग अब झारखंड में रह रहे हैं लेकिन उनका नाम किसी दूसरे राज्य की मतदाता सूची में दर्ज है, वे फॉर्म-8 भरकर अपना नाम झारखंड की मतदाता सूची में स्थानांतरित करा सकेंगे. सभी आवेदनों की जांच ईआरओ और एईआरओ स्तर पर की जाएगी.

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को यह भी बताया गया कि दावा-आपत्ति के लिए आधार के रूप में जन्म प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक प्रमाण-पत्र, स्थायी निवास प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, पेंशन भुगतान आदेश (PPO), सरकारी पहचान पत्र, वन अधिकार प्रमाण-पत्र, भूमि या आवास आवंटन पत्र सहित अन्य वैध दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे. इसके अलावा पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की मतदाता सूची को भी महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाएगा. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी अधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ दावा-आपत्ति का निस्तारण करने का निर्देश दिया, ताकि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो सके.