गुमला: झारखंड में मानसून की सुस्त चाल अब किसानों की चिंता बढ़ाने लगी है. राज्य के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण धान की खेती प्रभावित होने की आशंका है. गुमला जिले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां खेतों में अब तक उम्मीद के मुताबिक पानी नहीं पहुंच पाया है. हालांकि जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने इस चुनौती को पहले ही भांप लिया था. इसी वजह से धान के साथ-साथ वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने की तैयारी पहले से कर ली गई है. किसानों को दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती के लिए बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि कम बारिश के बावजूद उनकी खेती और आमदनी प्रभावित न हो. चलिए अब विस्तार से बताते है
गुमला जिले के कई इलाकों में इस बार बारिश सामान्य से काफी कम हुई है. इसका सीधा असर धान की खेती पर पड़ने की संभावना है. धान की रोपाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसान चिंतित हैं. लेकिन कृषि विभाग का कहना है कि मौसम विभाग के forecast को देखते हुए पहले ही वैकल्पिक खेती की रणनीति तैयार कर ली गई थी. इसी कारण इस बार लैम्प्स के माध्यम से धान के बीज का उठाव भी सीमित रखा गया.
कृषि विभाग ने किसानों के लिए मरुआ, मूंगफली, अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए हैं. विभाग का मानना है कि यदि धान की खेती प्रभावित होती है तो किसान इन वैकल्पिक फसलों की खेती कर नुकसान की भरपाई कर सकेंगे. इसके साथ ही किसानों को लगातार तकनीकी सलाह भी दी जा रही है ताकि वे मौसम के अनुसार फसल का चयन कर सकें.
जिला कृषि पदाधिकारी कुसुम प्रिया के अनुसार किसानों के लिए अरहर के 160 क्विंटल, उड़द के 73 क्विंटल, मूंग के 20 क्विंटल और मूंगफली के 60 क्विंटल बीज उपलब्ध कराए गए हैं. वहीं सीड प्रोडक्शन कार्यक्रम के तहत 10 हेक्टेयर में उड़द, 12 हेक्टेयर में मरुआ और 4 हेक्टेयर में धान की खेती कराई जा रही है. विभाग का उद्देश्य किसानों की आय को सुरक्षित रखना और कम बारिश के प्रभाव को कम करना है.
गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने भी किसानों को भरोसा दिलाया है कि प्रशासन हर परिस्थिति में उनके साथ है. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक परिस्थितियों पर किसी का नियंत्रण नहीं है, लेकिन उससे पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है. किसानों को हर संभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और उन्हें आर्थिक या तकनीकी परेशानियों का सामना नहीं करने दिया जाएगा.
फिलहाल कम बारिश ने किसानों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन कृषि विभाग का दावा है कि समय रहते की गई तैयारी और वैकल्पिक खेती की योजना किसानों के लिए राहत साबित होगी. अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में मानसून कितना साथ देता है और किसान किस हद तक इन वैकल्पिक फसलों को अपनाकर अपने नुकसान की भरपाई कर पाते हैं.
