पटना में साइबर ठगी का भांडा फोड़,500 से अधिक बैंक खातों का किया गया इस्तेमाल

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Digital News Desk • September 27, 2026

 पटना में साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जांच में पता चला है कि ग्रामीणों के नाम पर 500 से अधिक बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया जा रहा था

पटना (Patna): बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जांच में पता चला है कि ग्रामीणों के नाम पर 500 से अधिक बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया जा रहा था. पुलिस के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में इन खातों के जरिए 15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का ट्रांजैक्शन हुआ है.

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है और अब करोड़ों रुपये के लेन-देन की पूरी ट्रांसफर ट्रेल खंगाली जा रही है.

ग्रामीणों के खातों का साइबर ठगी में इस्तेमाल

जांच एजेंसियों के मुताबिक, दूसरे राज्यों की पुलिस के पटना पहुंचने और पीड़ितों की शिकायतों के बाद इस नेटवर्क का पता चला. शुरुआती जांच में सामने आया कि ग्रामीणों के नाम पर खोले गए बैंक खातों के जरिए रोजाना बड़ी रकम का संदिग्ध लेन-देन किया जाता था. इसके बाद पिछले तीन वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में 15 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन की जानकारी मिली.

महिला गिरफ्तार, दो मुख्य आरोपी फरार

कार्रवाई के दौरान साइबर पुलिस ने बाढ़ के सलेमपुर की रहने वाली सीता कुमारी को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि वह जीविका संगठन से जुड़ी रही है. जांच में नालंदा जिले के सरपंच संतोष मुखिया को इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया गया है, जबकि आजाद उसका प्रमुख सहयोगी माना जा रहा है. दोनों फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है.

छापेमारी में कई डिजिटल सबूत मिले

साइबर थाना प्रभारी संगीता कुमारी के अनुसार, आरोपितों के ठिकाने से 12 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, एक बायोमीट्रिक डिवाइस, दो बैंक पासबुक, दो एटीएम कार्ड और एक चेकबुक बरामद किए गए हैं. पुलिस इन उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके.

बैंक मित्रों की भूमिका भी जांच के घेरे में

जांच एजेंसियों का फोकस अब उन बैंक खातों तक पहुंचने पर है, जिनमें रकम भेजी और निकाली गई. साथ ही संदिग्ध बैंक मित्रों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ग्रामीणों के नाम पर खाते किस प्रक्रिया से खोले गए और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की संलिप्तता रही.