बच्चे रोज सुबह समय पर घर से स्कूल के लिए निकलते हैं, लेकिन नदी पार करने में ही काफी समय लग जाता है. कई बार लोहे का पीपा नदी की दूसरी तरफ चला जाता है. ऐसे में बच्चों को अपनी तरफ पीपा आने का इंतजार करना पड़ता है. इसके बाद रस्सी के सहारे पीपा खींचकर नदी पार की जाती है. इस दौरान तेज बहाव और पीपा के असंतुलित होने का खतरा बना रहता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार बच्चे पीपा का संतुलन बिगड़ने से नदी की धारा में गिर भी चुके हैं. इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अभिभावक उन्हें रोज इस खतरनाक रास्ते से स्कूल भेजने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि महाने नदी पर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं होने से बच्चों के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशानी होती है. बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से खतरा और अधिक बढ़ जाता है. बच्चों को स्कूल पहुंचने में देर होती है, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए नदी पर पुल या अन्य सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था जल्द की जाए. अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर कब तक समाधान करता है. इस पूरे मामले पर बच्चे, स्थानीय ग्रामीण और शिक्षक अपनी परेशानी और मांगों को लेकर क्या कहते हैं, यह भी सामने आना जरूरी है.
