बंदूक छोड़ी, हुनर थामा…रैंप पर दिखाया बदलते बस्तर का नया चेहरा
कभी नक्सली हिंसा के साए में जिंदगी जीने वाली सुकमा की 9 आत्मसमर्पित महिलाएं अब अपने हाथों से नई कहानी बुन रही हैं. हथियार का रास्ता छोड़कर इन महिलाओं ने कोसा सिल्क और हथकरघे को अपनी नई पहचान बनाया है. प्रशिक्षण के बाद वे पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं. इनके हुनर को रायपुर में आयोजित रैंप वॉक के जरिए मंच मिला, जहां इन महिलाओं ने कोसा सिल्क से तैयार परिधानों को पूरे आत्मविश्वास के साथ पेश किया. कभी संघर्ष और हिंसा के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर की ये महिलाएं अब हुनर, मेहनत और बदलाव की तस्वीर बनकर सामने आई हैं. कहानी सिर्फ 9 महिलाओं के बदलते जीवन की नहीं, बल्कि उस बस्तर की भी है, जहां नई पीढ़ी के लिए रोजगार, कला और सम्मान के रास्ते खुल रहे हैं.















