झारखंड के पारंपरिक और धार्मिक त्योहार: संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम

  • June 28, 2026 7:05 pm
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झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कृषि परंपराओं और धार्मिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ पूरे वर्ष अनेक पारंपरिक और धार्मिक त्योहार उत्साह, श्रद्धा और सामुदायिक एकता के साथ मनाए जाते हैं. ये त्योहार राज्य की सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक जीवन को दर्शाते हैं.

झारखंड के पारंपरिक और धार्मिक त्योहार: संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम
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झारखंड में, विशेष रूप से उरांव, मुंडा और हो जनजातियों द्वारामनाया जाता है . यह झारखंड का सबसे बड़ा जनजातीय पर्व है. इसमें साल वृक्ष की पूजा की जाती है और इसे आदिवासी नववर्ष तथा वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है.

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झारखंड के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में मनाया जाता है. करम देवता की पूजा की जाती है. यह युवाओं, समृद्धि, अच्छी फसल और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है.

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बुंडू, तमाड़ , राँची, पूर्वी सिंहभूम और आसपास के क्षेत्रों में मनाया जाता है. नई फसल और मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला पर्व है. इसमें विशेष रूप से अविवाहित लड़कियाँ लोकगीत गाती हैं.

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संथाल परगना और अन्य संथाल बहुल क्षेत्रों में मनाया जाता है. यह पशुधन और अच्छी फसल के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है. गाय-बैलों की पूजा की जाती है.

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कोल्हान और संथाल क्षेत्रों में मनाया जाता है . घरों को जनजातीय चित्रकला से सजाया जाता है तथा गाय-बैलों को नहलाकर और सजाकर उनकी पूजा की जाती है.

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झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में मनाया जाता है. यह खेती की शुरुआत का पर्व है. किसान इस दिन प्रतीकात्मक रूप से खेत की पहली जुताई करते हैं.