झारखंड की जंगली सब्जियां : जिनकी कीमत मौसम और उपलब्धता के अनुसार सैकड़ों से लेकर हजारों रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है.

  • June 20, 2026 6:07 pm
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बारिश का मौसम शुरू होते ही झारखंड के जंगलों में मिलने वाली वन सब्जियाँ और जंगली मशरूम बाजारों में दिखाई देने लगते हैं. रूगड़ा, खुखड़ी, बांस करील, कोयनार, चकोड़, गंधारी और फुटकल जैसी वन सब्जियाँ न केवल स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि पोषण से भी भरपूर होती हैं. इनकी मांग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बढ़ जाती है.स्थानीय लोगों के लिए ये आय और रोजगार का भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं.

झारखंड की जंगली सब्जियां : जिनकी कीमत मौसम और उपलब्धता के अनुसार सैकड़ों से लेकर हजारों रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है.
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झारखंड के साल जंगलों में बारिश के दौरान उगने वाला जंगली मशरूम है. रांची, खूंटी, गुमला और सिमडेगा में अधिक मिलता है. इसकी कीमत ₹300–1500 प्रति किलो तक हो सकती है. इसमें प्रोटीन, आयरन और विटामिन-B अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. स्वाद और पोषण के कारण इसे झारखंड का "शाकाहारी मटन" भी कहा जाता है.

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खुखड़ी एक जंगली मशरूम है जो जून-जुलाई में जंगलों में उगता है. यह स्थानीय हाट-बाजारों में ₹150-400 प्रति किलो बिकता है. प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में होते हैं. यह पाचन के लिए लाभदायक और कम कैलोरी वाला भोजन है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सब्जी बहुत पसंद की जाती है.

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बांस करील बांस के कोमल अंकुरों से प्राप्त होती है. पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा और गुमला के जंगलों में मिलती है. इसकी कीमत ₹30 - 100 प्रति किलो रहती है. इसमें फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. यह हृदय और पाचन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती है.

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कोयनार साग कचनार के पेड़ की कोमल पत्तियों और फूलों से प्राप्त होता है. रांची, हजारीबाग और पलामू क्षेत्रों में मिलता है. इसकी कीमत ₹ 60-90 प्रति गट्ठर होती है. कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में होता है. इसकी सब्जी और पकौड़े दोनों बनाए जाते हैं.

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चकोड़ साग बरसात में खेतों और जंगलों के किनारों पर उगता है. इसकी कीमत ₹30-60 प्रति गट्ठर रहती है. आयरन, कैल्शियम और फाइबर का अच्छा स्रोत है. इसे खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को ऊर्जा मिलती है. लोग इसे दाल के साथ खाना पसंद करते हैं.

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गंधारी साग झारखंड के वन क्षेत्रों में मिलने वाला पौष्टिक साग है. इसकी कीमत ₹20-50 प्रति गट्ठर होती है. विटामिन-A और विटामिन-C अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यह आंखों, त्वचा और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए लाभकारी है. स्थानीय लोग इसे स्वादिष्ट सब्जी के रूप में बनाते हैं.

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फुटकल साग की कोमल पत्तियों का उपयोग सब्जी बनाने में किया जाता है. रांची, खूंटी, गुमला और लोहरदगा क्षेत्रों में अधिक मिलता है. इसकी कीमत ₹20-40 प्रति गट्ठर रहती है. फाइबर से भरपूर होता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. पारंपरिक रूप से इसे पेट संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है.