बोल बम यात्रा: क्यों जाते हैं शिवभक्त देवघर? जानिए इतिहास, मान्यता की पूरी कहानी

  • July 7, 2026 3:05 pm
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सावन का महीना आते ही 'बोल बम' के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय हो उठता है. करोड़ों श्रद्धालु सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम तक कठिन पैदल यात्रा करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह यात्रा क्यों की जाती है, इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसकी धार्मिक मान्यता क्या है? आइए जानते हैं बोल बम यात्रा.

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बोल बम यात्रा भगवान शिव की सबसे पवित्र और कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है. हर वर्ष श्रावण (सावन) मास में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल भरकर लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं. इस पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालु "बोल बम", "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयकारे लगाते हुए भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हैं. यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या, अनुशासन, त्याग और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है.

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव के परम भक्त रावण ने उन्हें प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी. कहा जाता है कि उसने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और उन्हें प्रसन्न किया. एक अन्य मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए ग्रहण किया था. विष की जलन शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें गंगाजल अर्पित किया. तभी से भगवान शिव को गंगाजल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई. सावन में किया गया जलाभिषेक विशेष रूप से फलदायी माना जाता है

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बोल बम यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव का जलाभिषेक करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है. धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, संतान प्राप्ति, विवाह, रोजगार, व्यापार में सफलता तथा जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति की कामना लेकर इस यात्रा पर निकलते हैं. कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद धन्यवाद स्वरूप भी यह यात्रा करते हैं.

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बिहार का सुल्तानगंज भारत का एकमात्र ऐसा प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां गंगा उत्तर दिशा की ओर बहती है, जिसे उत्तरवाहिनी गंगा कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तरवाहिनी गंगा का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है. इसलिए श्रद्धालु यहीं से गंगाजल भरकर बिना कांवर को जमीन पर रखे पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम तक पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.

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झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. इसे 'कामना लिंग' भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना भगवान शिव पूरी करते हैं. यही कारण है कि सावन के महीने में यहां करोड़ों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.

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श्रद्धालु सबसे पहले सुल्तानगंज पहुंचकर गंगा स्नान करते हैं, इसके बाद पवित्र गंगाजल कांवर में भरते हैं और भगवान शिव का नाम लेते हुए पैदल यात्रा शुरू करते हैं. लगभग 105 किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान वे नंगे पैर चलते हैं, सात्विक भोजन करते हैं, ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और पूरी यात्रा में भगवान शिव के भजन-कीर्तन व जयकारे लगाते रहते हैं. देवघर पहुंचने के बाद वे बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर गंगाजल अर्पित कर अपनी यात्रा पूर्ण करते हैं.

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* सुल्तानगंज में गंगा स्नान और गंगाजल संग्रह. * कांवर सजाकर पैदल यात्रा की शुरुआत. * पूरे मार्ग में "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयकारे. * भजन, कीर्तन और शिव आराधना. * रास्ते में सेवा शिविर, भंडारे और चिकित्सा शिविर. * देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक. * श्रद्धालुओं द्वारा पूजा, रुद्राभिषेक और विशेष आरती. * सावन मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भागीदारी

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बोल बम यात्रा हमें केवल भगवान शिव की पूजा करना ही नहीं सिखाती, बल्कि धैर्य, अनुशासन, सेवा, त्याग, सहनशीलता, समानता और मानवता का भी संदेश देती है. इस यात्रा में अमीर-गरीब, छोटे-बड़े, महिला-पुरुष सभी एक समान भाव से भगवान शिव की भक्ति में शामिल होते हैं. यही कारण है कि बोल बम यात्रा भारत की सबसे बड़ी और सबसे प्रेरणादायक धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त करते हैं और बाबा बैद्यनाथ से सुख, शांति, समृद्धि तथा कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.