बर्तन धोने से पद्मश्री तक: दुलारी देवी के संघर्ष की मिसाल
12 साल की उम्र में शादी, आर्थिक तंगी, बर्तन धोकर जीवनयापन और अपनों को खोने का गहरा दर्द— दुलारी देवी की जिंदगी संघर्षों से भरी रही. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी मुश्किलों को ही अपनी ताकत बनाया और मधुबनी पेंटिंग के जरिए नई पहचान हासिल की. अपनी कला, मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने बिहार की इस पारंपरिक लोककला को देश ही नहीं, दुनिया भर में पहचान दिलाई. साल 2021 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया. आज दुलारी देवी हजारों युवाओं और कलाकारों के लिए प्रेरणा हैं. उनकी कहानी सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो और मेहनत पर विश्वास हो, तो हर सपना सच हो सकता है.















