बिहार की कला और संस्कृति: परंपरा, विरासत और लोकजीवन की जीवंत पहचान.

  • July 2, 2026 12:24 pm
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बिहार अपनी समृद्ध कला, संस्कृति और हस्तशिल्प के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है. यहाँ की पारंपरिक कलाएँ राज्य की सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन को दर्शाती हैं. बिहार सरकार प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, हस्तशिल्प मेलों और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इन कलाओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है. इससे कारीगरों को रोजगार मिलता है और बिहार की कला को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त हो रही है.

बिहार की कला और संस्कृति: परंपरा, विरासत और लोकजीवन की जीवंत पहचान.
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मधुबनी (मिथिला) पेंटिंग बिहार के मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी और समस्तीपुर जिलों में सबसे अधिक प्रसिद्ध है. इस कला में प्राकृतिक रंगों से देवी-देवताओं, प्रकृति, विवाह, पशु-पक्षियों और लोक जीवन का सुंदर चित्रण किया जाता है. बिहार सरकार कलाकारों को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, हस्तशिल्प मेले और प्रदर्शनियों में भाग लेने का अवसर प्रदान करती है. इस कला को GI टैग मिलने से इसकी पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है. सरकार पर्यटन और निर्यात के माध्यम से भी इस कला को बढ़ावा दे रही है.

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मंजूषा कला बिहार के भागलपुर (अंग क्षेत्र) की प्रसिद्ध लोक चित्रकला है. इसमें बिहुला-बिषहरी की लोककथा को चित्रों के माध्यम से दर्शाया जाता है. राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में इस कला को प्रदर्शित किया जाता है. पर्यटन विभाग भी इस कला के संरक्षण और प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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पटना कलम बिहार की ऐतिहासिक चित्रकला शैली है, जो पटना में विकसित हुई थी. इसमें आम लोगों के दैनिक जीवन, व्यवसाय और सामाजिक गतिविधियों का चित्रण किया जाता है. बिहार सरकार संग्रहालयों, कला दीर्घाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से इस कला का संरक्षण करती है. कलाकारों को प्रशिक्षण और प्रदर्शनियों में भाग लेने के अवसर दिए जाते हैं. यह कला बिहार की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

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सिक्की शिल्प बिहार के मिथिला क्षेत्र में प्रसिद्ध है. इसमें सुनहरे रंग की सिक्की घास से टोकरी, डिब्बे, खिलौने और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं. बिहार सरकार स्वयं सहायता समूहों और महिला कारीगरों को प्रशिक्षण तथा आर्थिक सहायता प्रदान करती है. हस्तशिल्प मेलों और ऑनलाइन विपणन के माध्यम से इस कला को बढ़ावा दिया जाता है. इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिलती है.

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सुजनी कढ़ाई बिहार के मुजफ्फरपुर, मधुबनी और दरभंगा क्षेत्रों में प्रसिद्ध है. इसमें कपड़ों पर हाथ से सुंदर कढ़ाई करके लोक जीवन, पशु-पक्षियों और सामाजिक विषयों का चित्रण किया जाता है. बिहार सरकार महिला कारीगरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराती है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में इस कला को बढ़ावा दिया जाता है. यह महिलाओं की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है

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टिकुली कला मुख्य रूप से पटना में प्रसिद्ध है. पहले यह काँच पर बनाई जाती थी, जबकि आज लकड़ी और हार्डबोर्ड पर भी बनाई जाती है. इसमें धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों का चित्रण किया जाता है. बिहार सरकार प्रशिक्षण, प्रदर्शनियों और विपणन सहायता के माध्यम से कलाकारों को प्रोत्साहित करती है. यह कला देश-विदेश में बिहार की पहचान बन चुकी है

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बावन बूटी बुनाई कला बिहार के नालंदा जिले के बसवन बिगहा गाँव में प्रसिद्ध है. इसमें कपड़ों पर 52 प्रकार के छोटे-छोटे शुभ प्रतीकों और डिज़ाइनों की बुनाई की जाती है. बिहार सरकार हथकरघा योजनाओं के तहत बुनकरों को प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता प्रदान करती है. इस कला को राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेलों में भी प्रदर्शित किया जाता है. यह बिहार की प्रसिद्ध वस्त्र कला मानी जाती है.

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पत्थरकट्टी शिल्प बिहार के गया जिले के पत्थरकट्टी गाँव में प्रसिद्ध है. इसमें काले पत्थर से देवी-देवताओं, बुद्ध और अन्य धार्मिक मूर्तियों की नक्काशी की जाती है. बिहार सरकार कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और विपणन सहायता उपलब्ध कराती है. पर्यटन विभाग इस कला के प्रचार-प्रसार में सहयोग करता है. यह शिल्प भारत और विदेशों में भी प्रसिद्ध है.

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पिड़िया चित्रकला बिहार के भोजपुर और आसपास के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है. यह महिलाओं द्वारा पिड़िया पर्व के अवसर पर घरों की दीवारों पर बनाई जाती है. इसमें धार्मिक प्रतीकों और लोक परंपराओं का चित्रण होता है. बिहार सरकार लोककला संरक्षण योजनाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से इस कला को बढ़ावा देती है. यह बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है.