बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत

  • July 1, 2026 6:35 pm
  • 10 Photos
  • 36 Views

बिहार भारत का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य है. यहाँ अनेक प्राचीन मंदिर, विश्वविद्यालय, किले, गुफाएँ और धार्मिक स्थल स्थित हैं. महाबोधि मंदिर, नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर, वैशाली और पटना साहिब जैसे प्रसिद्ध स्थान दुनिया भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं. इन स्थलों का संबंध भगवान बुद्ध, महावीर, गुरु गोबिंद सिंह जी और कई महान शासकों से रहा है. बिहार की यह ऐतिहासिक धरोहर भारत की प्राचीन सभ्यता, शिक्षा, धर्म और वास्तुकला की गौरवशाली पहचान है.

बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत
Photo 1 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 1

महाबोधि मंदिर बोधगया में स्थित है. यह प्रसिद्ध है क्योंकि यहीं भगवान गौतम बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था. इसकी शुरुआत सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाई थी. वर्तमान मंदिर 5वीं–6वीं शताब्दी का है. 2002 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया. यह बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है.

Photo 2 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 2

नालंदा विश्वविद्यालय बिहार के नालंदा जिले में स्थित है. इसकी स्थापना 5वीं शताब्दी में हुई थी. यह दुनिया का सबसे प्राचीन आवासीय विश्वविद्यालय माना जाता है. यहाँ एशिया के कई देशों से छात्र पढ़ने आते थे. 12वीं शताब्दी में यह नष्ट हो गया. 2016 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.

Photo 3 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 3

शेरशाह सूरी का मकबरा सासाराम में स्थित है. इसका निर्माण 1540–1545 ईस्वी के बीच हुआ. यह लाल बलुआ पत्थर से बना भव्य मकबरा है. यह एक कृत्रिम झील के बीच स्थित है. इसकी सुंदर वास्तुकला के कारण इसे भारत का दूसरा ताजमहल कहा जाता है. यह बिहार का प्रमुख ऐतिहासिक स्थान है.

Photo 4 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 4

गोलघर पटना में स्थित है. इसका निर्माण 1786 ईस्वी में अंग्रेजों ने कराया था. इसे अनाज भंडारण के लिए बनाया गया था. इसकी गोल आकृति और घुमावदार सीढ़ियाँ इसे खास बनाती हैं. ऊपर से गंगा नदी और पटना का सुंदर दृश्य दिखाई देता है. यह पटना का प्रमुख पर्यटन स्थल है.

Photo 5 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 5

बराबर गुफाएँ जहानाबाद में स्थित हैं. इनका निर्माण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक ने करवाया था. ये भारत की सबसे पुरानी चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएँ हैं. इनकी दीवारें बहुत चिकनी हैं और इनमें गूँज की अद्भुत विशेषता है. ये प्राचीन भारतीय वास्तुकला का शानदार उदाहरण हैं. यहाँ हर वर्ष पर्यटक आते हैं.

Photo 6 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 6

विक्रमशिला विश्वविद्यालय भागलपुर में स्थित है. इसकी स्थापना 8वीं शताब्दी में राजा धर्मपाल ने की थी. यह बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था. यहाँ हजारों विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते थे. 12वीं शताब्दी में यह नष्ट हो गया. आज इसके अवशेष ऐतिहासिक धरोहर हैं.

Photo 7 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 7

वैशाली बिहार का प्राचीन ऐतिहासिक नगर है. यह दुनिया का पहला गणराज्य माना जाता है. भगवान बुद्ध और भगवान महावीर दोनों का इससे गहरा संबंध है. यहाँ प्रसिद्ध अशोक स्तंभ और प्राचीन स्तूप हैं. इसका इतिहास लगभग 2500 वर्ष पुराना है. यह बौद्ध और जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है.

Photo 8 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 8

साहिब गुरुद्वारा पटना में स्थित है. यह गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मस्थान है. उनका जन्म 1666 ईस्वी में यहीं हुआ था. यह सिख धर्म के पाँच तख्तों में से एक है. यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं. यह सिखों का प्रमुख धार्मिक स्थल है.

Photo 9 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 9

राजगीर नालंदा जिले में स्थित है. यह प्राचीन मगध साम्राज्य की पहली राजधानी थी. भगवान बुद्ध और भगवान महावीर यहाँ कई बार आए थे. यहाँ विश्व शांति स्तूप, गर्म कुंड और बिंबिसार जेल प्रसिद्ध हैं. इसका इतिहास लगभग 2500 वर्ष पुराना है. यह बिहार का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है.

Photo 10 of 10
बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर: भारत की गौरवशाली विरासत - Photo 10

मनेर शरीफ पटना जिले में स्थित प्रसिद्ध सूफी दरगाह है. यह हज़रत मखदूम शाह शरफुद्दीन याहिया मनेरी से जुड़ी है. इसका मकबरा 17वीं शताब्दी में मुगल काल में बना था. इसकी सुंदर नक्काशी बहुत प्रसिद्ध है. यहाँ सभी धर्मों के लोग श्रद्धा से आते हैं. यह बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण स्थल है.