बिहार के 10 प्रसिद्ध त्योहार – क्यों और कैसे मनाए जाते हैं?

  • July 9, 2026 1:43 pm
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बिहार भारत का एक सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से समृद्ध राज्य है. यहाँ अनेक त्योहार पूरे उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाए जाते हैं. ये पर्व लोगों की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक हैं. प्रत्येक त्योहार का अपना धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है. छठ पूजा से लेकर तीज तक, हर पर्व बिहार की अनूठी पहचान को दर्शाता है. आइए बिहार के प्रमुख त्योहारों के बारे में संक्षेप में जानते हैं.

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छठ पूजा बिहार का सबसे प्रसिद्ध और पवित्र त्योहार है. यह सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए मनाया जाता है. इस पर्व में चार दिनों तक कठिन व्रत रखा जाता है. श्रद्धालु डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना की जाती है. यह बिहार की संस्कृति और आस्था का प्रतीक है.

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होली रंगों और प्रेम का त्योहार है. बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं. मिठाइयाँ और पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं. परिवार और मित्र मिलकर खुशियाँ मनाते हैं. यह सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देता है.

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दुर्गा पूजा माँ दुर्गा की आराधना का प्रमुख पर्व है. यह नौ दिनों तक मनाया जाता है. मंदिरों और पंडालों में विशेष पूजा होती है. दशहरे के दिन प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है. यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है. बिहार में इसे भव्य रूप से मनाया जाता है

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जिउतिया व्रत माताएँ अपने बच्चों की लंबी आयु के लिए रखती हैं. यह निर्जला और कठिन व्रत माना जाता है. इस दिन विशेष पूजा और कथा का आयोजन होता है. महिलाएँ पूरे श्रद्धा से व्रत का पालन करती हैं. यह मातृत्व और प्रेम का प्रतीक है.

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सामा-चकेवा मिथिला का प्रसिद्ध लोकपर्व है. यह भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है. कार्तिक महीने में इसे मनाया जाता है. लड़कियाँ मिट्टी की सुंदर मूर्तियाँ बनाती हैं. लोकगीत और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. यह बिहार की लोक संस्कृति को दर्शाता है.

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बिहुला अंग क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकपर्व है. यह बिहुला और लखिंदर की कथा पर आधारित है. इस पर्व में देवी मनसा की पूजा की जाती है. लोकगीत और नाटक प्रस्तुत किए जाते हैं. प्रेम, साहस और विश्वास का प्रतीक है. बिहार की लोक परंपरा में इसका विशेष स्थान है.

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मधुश्रावणी नवविवाहित महिलाओं का प्रमुख पर्व है. श्रावण महीने में मनाया जाता है. महिलाएँ शिव-पार्वती और नाग देवता की पूजा करती हैं. सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है. इस पर्व में कई पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए जाते हैं. मिथिला क्षेत्र में यह बहुत प्रसिद्ध है.

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वट सावित्री पूजा विवाहित महिलाओं का महत्वपूर्ण व्रत है. महिलाएँ पति की लंबी आयु के लिए उपवास रखती हैं. बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है. सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा है. महिलाएँ श्रद्धा से पूजा और परिक्रमा कर

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तीज महिलाओं का प्रमुख धार्मिक पर्व है. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. महिलाएँ सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं. झूला झूलती हैं और लोकगीत गाती हैं. पारंपरिक वस्त्र पहनकर पूजा करती हैं. बिहार में यह त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है.

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मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाई जाती है. यह नई फसल और शुभ शुरुआत का पर्व है. इस दिन दही-चूड़ा, तिल और गुड़ खाने की परंपरा है. लोग पवित्र नदियों में स्नान और दान करते हैं. यह समृद्धि और खुशहाली का संदेश देता है. पूरे बिहार में इसे बड़े उत्साह से मनाया जाता है.